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प्रीतम के हौसले को किया सलाम

Sun, 24 Apr 2016 12:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
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पैर से प्रवेश परीक्षा देता प्रीतम। - फोटो : अमर उजाला
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हौसले अगर बुलंद हो तो मंजिल भी मिल ही जाती है। कुछ लोग होते हैं जो अपने हौसलाें से दूसरे के लिए मिसाल बन जाते हैं।  ऐसा ही कुछ दिखाई दिया बीएड की परीक्षा के दौरान नोसगे सीनियर सेकेंड्री स्कूल में हाथ नहीं होने के कारण पैरों से प्रश्नों का उत्तर दे रहे प्रीतम में। 
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अपनी अक्षमता का बहाना करके जीवन से हार मानने के बजाय खुद के लिए समाज में अलग पहचान हासिल करने की जिद ठानी और उस राह पर आगे बढ़ रहे हैं। उनके बुलंद हौसले जता रहे हैं कि वे वह सब हासिल करेंगे जो वो चाहते हैं।
हुसैनपुर ढाका चांदपुर बिजनौर निवासी प्रीतम सिंह के जन्म से दोनों ही हाथ विकसित नहीं हो पाए। पिता मुन्ना सिंह परचून की दुकान चलाते हैं। समझदार होने पर प्रीतम ने जब अपनी उम्र के बच्चों को स्कूल जाते हुए देखा तो पिता से स्कूल जाने की जिद की। उन्होंने स्कूल तो भेजा, लेकिन लिखाई के बिना पढ़ाई का महत्व नहीं होने पर उसे पैरों से लिखना सिखाया। पिता उसे पैर में पेंसिल फंसाकर लिखने का अभ्यास कराते। धीरे-धीरे प्रीतम ने पैरों से लिखना शुरू कर दिया।  प्रीतम ने इसी प्रकार से हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और बीए की पढ़ाई की। अब वे गुलाबी सिंह महाविद्यालय चांदपुर में एमए प्रथम वर्ष के छात्र हैं। बीएड प्रवेश परीक्षा में ओएमआर सीट पर उत्तर के गोलों को सटीकता से भर रहे थे। कहीं से नहीं लग रहा था कि जो कुछ लिखा है वह हाथों से नहीं पैरों से लिखा गया है। उनका सपना है कि वे शिक्षक बनेें। इसके लिए बीएड की प्रवेश परीक्षा दी। प्रीतम ने बताया कि बीएड करने के बाद उम्मीद है कि वे अपने मकसद में कामयाब होंगे। प्रीतम के बड़े भाई भी परिषदीय स्कूल में शिक्षक हैं।
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