गेहूं के दाम कम, बीज 300 रुपये प्रति क्विंटल महंगा
बिजनौर। बाजार में गेहूं के दाम कम है और गेहूं का बीज पिछले साल के मुकाबले 300 रुपये प्रति क्विंटल महंगा है। किसानों ने इस बार कृषि विभाग की दुकानों व निजी दुकानों से उन्नतशील प्रजातियों के बीज की खरीदारी कम की है। किसान घर का बीज ही खेतों में बो रहे हैं। दिसंबर के पहले सप्ताह तक जब कृषि विभाग की दुकानों पर बहुत कम बीज बचता था इस बार करीब तीन हजार क्विंटल गेहूं कृषि विभाग के पास बचा हुआ है।
इस साल कृषि विभाग के पास करीब 8183 क्विंटल बीज आया है। इसमें से अब तक केवल 5200 क्विंटल बीज ही बिक पाया है। निजी दुकानों पर 56 हजार 745 क्विंटल बीज आया है। अब तक इसमे से 40 हजार क्विंटल बीज ही बिका है। आमतौर पर 15 दिसंबर तक ही गेहूं बोने का सही समय माना जाता है। गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1925 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि बाजार में किसानों को गेहूं के दाम 1600 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहे हैं। फसल के दाम कम होने की वजह से किसान महंगे बीज को नहीं खरीद रहे हैं। जिले में इस साल डेढ़ लाख हेक्टेयर से अधिक गेहूं बोने की बात कही जा रही है।
इन प्रजातियों का बीज है कम
पीबीडब्लू 723, पीबीडब्लू 3433 उन्नत, एचडी 3086, एचडी 3059 बीज अब भी उपलब्ध हैं। पीबीडब्लू जेडएन-वन व डब्लू बी प्रजाति का बीज लगभग खत्म हो गया है। इन दोनों प्रजाति के गेहूं में पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती है।
मिलता है आधारीय और प्रमाणिक बीज
बाजार में बीज दो श्रेणी में बिकता है आधारीय व प्रमाणिक। आधारीय बीज से तैयार फसल के बीज को चार से पांच साल तक खेतों में बोया जा सकता है। प्रमाणिक बीज से तैयार फसल के बीज को केवल तीन साल तक बोया जाता है। कृषि विभाग के गोदाम पर मिलने वाले आधारीय बीज के दाम 3815 व प्रमाणिक बीज के दाम 3580 रुपये प्रति क्विंटल हैं। इस पर 50 प्रतिशत की सब्सिडी मिलती है। पिछले साल आधारीय बीज के दाम 3515 व प्रमाणिक बीज के दाम 3240 रुपये प्रति क्विंटल थे। इस बार मूल्य में 300 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा हुआ है।
बार-बार एक प्रजाति का बीज बोने से होता है कम उत्पादन
किसान पहले खेतों में उगने वाले गेहूं के बीज को ही सालों तक बोते रहते थे। एक ही बीज को बार-बार बोने से उत्पादन कम होता है साथ ही उसका दाना काला होने लगता है।
अधिकारी बोले, महंगाई का असर
जिला कृषि अधिकारी अवधेश मिश्र के अनुसार किसान इस बार उन्नत प्रजाति का बीज बोने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। शायद बीज महंगा होने की वजह से ऐसा हो रहा है। कृषि विभाग के गोदामों पर किसानों के लिए उन्नत प्रजाति का बीज उपलब्ध है। किसान इन बीज को बोकर उत्पादन बढ़ा सकते हैं।
किसान नेता बोले, खेती को गिरवी रखने की साजिश
भाकियू के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि खेती को पूंजीपतियों के यहां गिरवी रखने की साजिश चल रही है। पूंजीपतियों का गेहूं का बीज महंगा और किसान की फसल सस्ती है। सरकार का किसानों से कोई मतलब नहीं रह गया है।
सरकार का दोहरापन हो रहा उजागर
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन जिलाध्यक्ष विनोद कुमार का कहना है कि गेहूं का जो बीज सरकार बेच रही है यह भी कहीं न कहीं किसानों से ही सस्ते मूल्यों पर खरीदा गया है। केवल किसान की फसल का रेट कम मिलता है। सरकार का दोहरापन यहीं सबके सामने उजागर हो रहा है।