किरतपुर में इज्तमा में दुआ के लिए उमड़ी भीड़।
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बिजनौर के किरतपुर में मुस्लिम इंटर कॉलेज के मैदान में आयोजित दो रोजा तब्लीगी इज्तमा के आखिरी दिन उलेमा के बयान सुनने और दुआओं में शामिल होने के लिए अकीदतमंदों का सैलाब उमड़ पड़ा। दिल्ली मरकज के मौलाना महमूद साहब के दुआ कराने के बाद इज्तमा का समापन हो गया।
इज्तमा में दुआ से पहले अकीदतमंदों से खिताब करते हुए मौलाना महमूद ने फरमाया कि हिदायत वह नूर है, जिसकी रोशनी में जिंदगी संवरती हैं। दीन और ईमान का रास्ता मिलता है। दीन की दावत देना हर ईमान वाले मुसलमान का फर्ज है। अल्लाह हमको अपने दीन की हिफाजत दावत के जरिए करना सिखाता है। ईमान के रास्ते पर निकलकर दीन की दावत देने का बहुत बड़ा अज्र है। क्योंकि यह वह नेक काम है, जो हमारे नबियों ने किया है। उन्होंने कहा कि हर ईमान वाले को इतनी इबादत करनी चाहिए कि अल्लाह उससे राजी हो जाए। दुनिया की सारी चीजें अल्लाह ने बनाई है। उन्होंने जरूरतमंदों की मदद करने को आला दर्जे का सवाब बताते हुए मुस्लिमों से अपनी जरूरतें कम कर दूसरों की मदद करने का आह्वान किया।
दिल्ली मरकज के मौलाना महमूद ने दुआ कराई। इसमें भारी तादाद में अकीदतमंदों ने हिस्सा लिया। अकीदतमंदों ने शांतिपूर्ण माहौल में अल्लाह के दरबार में दीन से जुड़ने, मुल्क व दुनिया में अमनो-अमान और तरक्की के लिए दुआ की। दुआ के वक्त इज्तमा स्थल पर खामोशी छा गई और माहौल नूरानी हो गया। जनपद के कोने-कोने से आए हजारों की तादाद में लोगों ने दुआ में शिरकत की। दुआ के बाद दो रोजा इज्तमा का समापन हो गया। शुक्रवार को इज्तमा में 67 निकाह हुए थे। दुआ से पहले पांच युवक-युवतियों के निकाह हुए। इज्तमा में दुआ में शामिल होने के लिए उमड़ पड़े सैलाब की वजह से कई घंटे हाईवे जाम रहा।
शनिवार को फज्र की नमाज के बाद इज्तमा में अकीदतमंदों से मुखातिब मास्टर सदरूद्दीन साहब बलिया वालों ने अपने बयान में फरमाया कि आज जो मुसलमान पर जुल्म हो रहे हैं। यह सब हमारे अखलाक और ईमान में कमजोरी की बदौलत है। उन्होंने कहा कि गर इंसान अल्लाह और दीन के बताए रास्ते पर चले तो अल्लाह दुनिया को उनके कदमों में डाल देगा। तब्लीग काम को करने वाले इंसान दोनों जहां की कामयाबी हासिल कर लेता है। उन्होंने बच्चों की परवरिश दीनी माहौल में करने के साथ-साथ उनकी सेहत का भी ख्याल रखकर की जाए। उन्होंने बच्चों में होने वाली बीमारियों व उनकी रोकथाम के लिए सरकारों द्वारा चलायी जाने वाली स्वास्थ्य योजनाओं में हिस्सा लेने और टीका करण व पोलियों अभियान को कामयाब बनाने के लिए अपना हिस्सेदारी देने की बात कही।
किरतपुर में मगरिब की नमाज के बाद अकीदतमंदों से मुखातिब मौलाना महमूद बस्तवी ने कहा कि इस्लाम की दावत प्यार और मौहब्बत से दी जाती है। हमारे नबियों और सहाबा इकराम ने मजहब ए इस्लाम प्यार-मौहब्बत से ही फैलाया है। इस्लाम इंसान को प्यार व अखलाक सिखाता है जुल्म और जुल्म करने वालों की इस्लाम में कोई जगह नही है। उन्होने तब्लीगी जमातियों को हर काम मशविरे के बाद करने की सलाह दी। किरतपुर में यह छठा तब्लीगी इज्तमा हुआ है और किरतपुर में सबसे पहला इज्तमा जुलाई 1964 में मुस्लिम इंटर कॉलेज के इसी मैदान पर हुआ था। तब्लीगी जमात से जुड़े स्थानीय मौहल्ला काजीयान निवासी मौहम्मद अबरार अलवी ने बताया कि किरतपुर में पहले तब्लीगी इज्तमा सन् 1964 और इसके बाद 1967, 1971, 1972 व 1976 में हुआ था। किरतपुर में सबसे पहले तब्लीगी जमात के बानी मरहूम शुजाअत अली सिद्दिकी थे। इनके बाद सन् 1960 में अमीर ए जमात हाजी हाजी अब्दुल हमीद को बनाया गया था। मौहल्ला काजियान की मस्जिद में तब्लीगी जमात का मरकज 1963 में बना था। अबरार अलवी बताते है कि जिले में सबसे पहला तब्लीगी इज्तमा दो,तीन व चार नवंबर 1963 को कस्बा नहटौर में हुआ था।