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जिले में बिजली संकट चरम पर पहुंचा

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जिले में बिजली संकट गहराया
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बिजनौर। जिले में विद्युत संकट गहरा गया है। विद्युत आपूर्ति बुरी तरह चरमरा गई है। जिला मुख्यालय पर घंटों बिजली गुल रहती है। गांवों में स्थिति बद से बदतर है। लोग गर्मी से बिलबिलाते रहते हैं। पीने के पानी का संकट पैदा हो गया है। अधिकारी लोगों की पीड़ा सुनने के लिए फोन नहीं उठाते हैं।
गर्मी चरम पर पहुंचते ही विद्युत व्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ा गई है। इस समय संकट अपने चरम पर है। जिला मुख्यालय पर 24 घंटे विद्युत आपूर्ति के आदेश है। परंतु बिजली आदेशों के अनुसार नहीं मिल रही है। घोषणा केवल कागजों तक सिमट कर रह गई है। गर्मी से लोगों का जीना मुहाल हो गया है। बिजली संकट का व्यापारिक कार्यों पर असर है। कोरोना से बेरोजगारी की मार झेल रहे लोगों की परेशानी बिजली संकट ने बढ़ा दी है। आरोप है कि जब बिजली समस्या के बारे में अधिकारियों व कर्मचारियों को फोन किए जाते हैं तो कोई फोन नहीं उठाता। एडवोकेट गौरव भारद्वाज तथा नृपेंद्र देशवाल का कहना है कि उपभोक्ताओं की कहीं सुनवाई नहीं हो रही।
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गांवों में बिजली की स्थिति बहुत खराब है। भाकियू के वयोवृद्ध नेता रामौतार सिंह का आरोप है कि गांवों को 18 घंटे बिजली आपूर्ति के आदेश महज कागजी रह गए हैं। चारा काटने की मशीन नहीं चल रही है। फसल सूख रही है।
चुनाव में बिजली संकट की किसी को चिंता नहीं
ग्रामीणों बलराम सिंह, सतबीर सिंह, लोकेंद्र सिंह आदि का कहना है कि किसी को भी जनता की समस्याओं से कोई मतलब नहीं रह गया है। बिजली को लेकर हाहाकार मचा है। नेता पहले जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में व्यस्त थे और अब ब्लाक प्रमुख के चुनाव में लग गए हैं। सांसद तथा विधायक भी मौन हैं।
फैल रहा प्रदूषण
बिजली घंटों गुल रहती है। गली मोहल्लों में जनरेटर चल रहे हैं। लोगों का आरोप है कि जनरेटर से निकलने वाले धुएं से लोगों को और भी परेशानी हो रही है। सांस लेना मुश्किल हो जाता है। गृहणियों कमला, मीनाक्षी, कौशल आदि का कहना है कि जल्द बिजली व्यवस्था सुधारी जाए।
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लोड बढ़ने से विद्युत आपूर्ति प्रभावित
एसडीओ विद्युत राहुल गौतम का कहना है कि गर्मी बढ़ने से एसी आदि उपकरण का इस्तेमाल बढ़ा है। इस कारण बिजलीघरों का लोड बढ़ा है। जिससे तकनीकी फाल्ट हो जाते हैं। व्यवस्था सुचारु करने के प्रयास हैं।
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