तीन से चार गुना दाम पर बेचा जा रहा आलू
बिजनौर। आलू की फसल पर छाई महंगाई के बादल किसानों की तरफ से तो छंटने लगे हैं लेकिन उपभोक्ताओं को अब भी सस्ता आलू नहीं मिल पा रहा है। आढ़त से उठते ही उपभोक्ताओं से तीन से चार गुना मूल्य पर आलू बेचा जा रहा है। किसान को तो फसल का उचित मूल्य मिल रहा है लेकिन सब्जी उपभोक्ताओं को ज्यादा ही महंगी मिल रही है।
लॉकडाउन के बाद से आलू के दामों पर महंगाई छाई है। आढ़त पर ही आलू के दो हजार रुपये प्रति क्विंटल तक थे। आलू के फुटकर मूल्य 25 से 30 रुपये प्रति किलो तक चले गए थे। मार्च से अब तक आलू के दाम 25 रुपये प्रति किलो से कम अब तक नहीं हुए हैं। नवंबर में तो आलू के फुटकर मूल्य 55 रुपये प्रति किलो तक थे। अब आलू के दाम फुटकर में 25 से 30 रुपये प्रति किलो तक चल रहे हैं। जबकि आढ़त पर आलू के दाम केवल आठ से नौ रुपये प्रति किलो तक ही चल रहे हैं। यानि किसानों को तो फसल के दाम आठ से नौ रुपये तक मिल रहे हैं लेकिन व्यापारियों को इसी आलू के तीन से साढ़े तीन गुना मूल्य तक चुकाना पड़ रहा है। मूली और शलजम आढ़त पर दो रुपये प्रति किलो तक हैं जबकि यह उपभोक्ताओं को दस रुपये प्रति किलो तक में बेचे जा रहे हैं। किसान की फसल का मुनाफा व्यापारी ही ले रहे हैं।
फसल आढ़त मूल्य फुटकर मूल्य
आलू 8-9 25-30
प्याज 15 30
गाजर 07 20
चना साग 30 50
बैंगन 10 15
मूली 02 10
शलजम 02 10
नोट: सब्जी के दाम मंडी से लिए गए हैं और प्रति किलो में हैं।