बिजनौर में पत्रकारों से वार्ता करती डॉ. तजीन अहमद।
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बिजनौर। बढ़ते प्रदूषण की वजह से लोगों में अस्थमा की परेशानी बढ़ रही है। ध्यान नहीं रखने पर अस्थमा की परेशानी बढ़कर सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) का रूप ले रही है। इसलिए सर्दियों में दिनों में प्रदूषण से खुद का बचाव करें। यह जानकारी प्रेसवार्ता करते हुए डॉ. तजीन आरिफ ने दी।
तंबाकू का सेवन करने से इसका धुआं फेफड़ों को कमजोर कर रहा है। इसके अलावा स्वच्छ वातावरण में नहीं रहना, व्यायाम नहीं करना सबसे बड़ी समस्या बनकर उभर रही है। इसके आगे डॉ. तंजीन अहमद ने बताया कि इस बार विश्व सीओपीडी दिवस पर ‘जीवन के लिए है आपके फेफड़े’ थीम रखी गई है। फेफड़े मजबूत करने के लिए गुब्बारों में हवा भरनी चाहिए। कम उम्र में ही लोगों को सीओपीडी की समस्या दिखाई दे रही है।
गांवों में सर्दियों में दिनों में चूल्हे पर खाना बनता है, उस समय ठंड से बचने के लिए भी वहीं बैठ जाते हैं। जिसका धुंआ शरीर में जाकर फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। इसके अलावा प्रदूषण से बचाव के लिए बाहर मास्क का प्रयोग करें। शहरों में रूम फ्रेशनर लगाएं। सर्दियों में वायरस वातावरण की नीचली सतह पर रहते हैं, जो सीओपीडी के मरीजों को ज्यादा प्रभावित करते हैं। इसलिए सर्दियों में प्रदूषण से बचाव जरूरी है।