फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bijnor News: प्रदूषण बच्चों के फेफड़ाें को भी बना रहा कमजोर

Tue, 07 May 2024 05:05 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

बिजनौर। विश्व अस्थमा दिवस आज मनाया जा रहा है। अस्थमा से बुजुर्ग ही नहीं बल्कि बच्चे भी ग्रसित हैं। लगातार बच्चों में यह अस्थमा की समस्या बढ़ रही हैं। प्रदूषण बच्चों के फेफड़ों को कमजोर बना रहा है। मेडिकल अस्पताल में सांस से संबंधित समस्या के रोजाना 30 मरीज तक पहुंच रहे हैं। इनमें दो से तीन बच्चे भी शामिल रहते हैं।

अस्थमा में सांस की नली सख्त हो जाती है और उसमें सूजन आ जात़ी है। जिससे मरीजों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। इसी वजह से सांस फूलने और खांसी की समस्या रहती है। इस समय मेडिकल अस्पताल में सांस की बीमारी से संबंधित करीब 10 मरीज भर्ती हैं। जिनका इलाज चल रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि अस्थमा खासकर प्रदूषण के कारण होता है। बच्चों में यह जेनेटिक भी हो सकता है। अगर किसी बच्चे के माता-पिता को अस्थमा है तो बच्चे को होने की अधिक आशंका रहती है। मगर सही इलाज नहीं मिल पाने की वजह से समस्या बढ़ रही है। छह साल से पहले बच्चों में अस्थमा की पुष्टि नहीं हो सकती है।
विज्ञापन

- अस्थमा के लक्षण
- सांस फूलना
- छाती में जकड़न महसूस होना
- सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आना
- सांस लेने में दिक्कत होना
अस्थमा पीड़ित ऐसे करें बचाव
- निर्माण स्थल या प्रदूषित इलाके में जाने से बचें
- धूम्रपान करने वालों से दूर रहें
- पालतू जानवरों और पक्षियों से एलर्जी हो सकती हैं, उनसे दूर रहें
- अगर वायरल चल रहा है तो मास्क लगाकर बाहर निकलें
- निमोनिया से बचाव करें
- फ्लू वैक्सीन जरूर लगवाएं
- व्यायाम करें
- चिकित्सक के परामर्श पर इन्हेलर का प्रयोग करें
- मेडिकल अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र सिंह का कहना है कि बच्चों में भी अस्थमा की समस्या बढ़ी है। पहले सप्ताह में एक या दो बच्चे अस्थमा की बीमारी के आते थे। लेकिन अब रोजाना एक-दो बच्चे आते हैं। सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।
- बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विभू शर्मा ने बताया कि बच्चों को अस्थमा प्रदूषण और जेनेटिक दोनों तरह से हो सकता है। साथ ही अगर धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के पास बच्चा रहता है तो उससे भी अस्थमा होने का खतरा है। सर्दियों, गेहूं कटाई, थ्रेसिंग के समय बच्चों में अस्थमा की समस्या अधिक रहती हैं।
- मेडिकल अस्पताल के चिकित्सक डॉ. आरएस वर्मा ने कहा कि अस्पताल में रोजाना करीब 30 मरीज तक सांस की समस्या के आ रहे हैं। अस्थमा रोगी धूम्रपान और ठंडी चीजों का सेवन नहीं करें। इससे समस्या बढ़ सकती है। समस्या बढ़ने पर मरीजों को अस्पताल में भर्ती भी किया जा रहा है।
विज्ञापन

- छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल अग्रवाल का कहना है कि अस्थमा श्वास नली की गंभीर समस्या है। इस बार विश्व अस्थमा दिवस की थीम जागरूकता और सशक्तीकरण है। सभी को अस्थमा नियंत्रण के प्रति जागरूक रहना चाहिए। एलर्जी, प्रदूषण, धूल, धुएं से अस्थमा बढ़ रहा है। इसलिए इस सब चीजों से बचाव करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें