- 57 एएफपी केस इस साल बिजनौर में मिले
- एएफपी केसों में नहीं मिला पोलियो का वायरस
- 2011 में मिला था पोलियो का आखिरी केस
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। भले ही जिले में पिछले 12 सालों से पाेलियो का कोई मरीज नहीं मिला हो, मगर स्वास्थ्य विभाग पोलियो को लेकर सतर्कता दिखा रहा है। बिजनौर में इस साल 57 एएफपी (तीव्र शिथिलता पक्षाघात) केस मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इन मरीजों का स्टूल टेट भी कराया। हालांकि इन मरीजों में पोलियो का वायरल नहीं मिला है।
चिकित्सक एएफपी को एक्यूट फ्लैसिड पैरालाइसिस कहते हैं। मगर इसे तीव्र शिथिलता पक्षाघात के नाम से भी जाना जाता है। एएफपी केस को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क है। एएफपी केस की सूचना मिलते ही विभाग जांच के लिए स्टूल का नमूना लेने पहुंच जाते हैं। अधिकारियों की मानें तो इन मरीजों में पोलियो जैसे ही लक्षण मिले हैं। इन मरीजों को तेज बुखार, सिर दर्द जैसी समस्या हुई थी। हालांकि जब इनके स्टूल की जांच हुई तो उसमें पोलियों का वायरस नहीं मिला। इसके अलावा इन सभी मरीजों ने पोलियो की दवा भी पी रखी थी। एएफपी केस की श्रेणी में एक साल की उम्र के बच्चे से लेकर 15 साल की उम्र तक किशोर को रखा जाता है। इन बच्चों को अन्य कारणों से लुंज-पुंज की समस्या हुई है। इसमें अचानक ही हाथ-पैर, मुंह पर दिव्यांगता आ जाती है।
साल 2022 में मिले एएफपी के 79 केस
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक बिजनौर में साल 2022 में एएफपी के 79 केस मिले हैं। सभी मरीजों की जांच की गई। मगर किसी में भी पोलियो के वायरस की पुष्टि नहीं हुई। सामान्य तौर पर किसी अन्य बीमारियों की वजह से उन्हें एएफपी हुआ है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि बिजनौर में साल 2011 में पोलियो का आखिरी केस मिला था। इसके बाद से किसी भी बच्चे में पोलियो की पुष्टि नहीं हुई है। पांच साल तक के सभी बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जाती है। पोलियो का वायरस बिल्कुल खत्म हो चुका है।
इन कारणों से हो सकता है एएफपी
- जीबी सिंड्रोम पैरालाइसिस
- ट्रांसवर्स माइलाइटिस पैरालाइसिस
- ट्रांजियंट पैरालाइसिस
- ट्रामेटिक न्यूराइटिस पैरालाइसिस
- पोलियो माइलाइटिस पैरालाइसिस
वर्जन::
जिले में इस साल एएफपी के 57 केस मिले हैं। सूचना मिलने के बाद सभी का स्टूल लेकर डब्ल्यूएचओ की मदद से जांच के लिए नई दिल्ली भेजा। सभी की जांच रिपोर्ट आ गई है। किसी में भी पोलियो का वायरस नहीं मिला है। अगर एएफपी केस की संख्या बढ़ती है तो कह सकते हैं कि विभाग की सर्विलांस ठीक है। जिससे अधिक से अधिक मरीजों की पोलियो की जांच हो सकेगी- डॉ. अशोक कुमार, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी, बिजनौर