पुलिस की पाठशाला : समस्या से डरें नहीं, उसका मुकाबला करें बेटियां
धामपुर। पुलिस क्षेत्राधिकारी इंदू सिद्धार्थ ने कहा कि छात्राएं अपने लक्ष्य को प्राप्त करें। सरकार की ओर से महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। अब उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। मिशन शक्ति की टीमों की ओर से आए दिन असामाजिक तत्वों की खबर ली जा रही है। यदि उन्हें किसी प्रकार का खौफ है तो विचलित न हों। शिक्षकों, परिजनों से जरूर साझा करें।
लाला केदारनाथ बालिका विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में अमर उजाला फाउंडेेशन की ओर से मंगलवार को हुई पुलिस की पाठशाला में सीओ ने वूमेन हेल्प लाइन नंबर 1090, 181, 1098, 1076, 112 के बारे में जानकारी दी। कहा कि यदि स्कूल कॉलेजों आते जाते कोई दिक्कत है तो वह इन नंबरों को डायल कर पुलिस से मदद ले सकती है। 10 मिनट के भीतर पुलिस उनकी सुरक्षा के लिए पहुंच जाएगी। कहा आजकल साइबर क्राइम में वृद्धि हो रही। सोशल मीडिया का प्रयोग जरूरी हो तो ही करें। अपनी कोई भी निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न दें। महिला पुलिस रिपोर्टिंग चौकी की प्रभारी मुन्नी राठी, कोतवाल माधो सिंह बिष्ट ने भी छात्राओं सुरक्षा के टिप्स दिए। प्रधानाचार्य आभावती रानी, मीनाक्षी शर्मा, वर्षा रानी, खुशबू, मोनिका रानी, पारूल आदि मौजूद रहीं। संचालन शिक्षिका अपर्णा रानी ने किया।
बोली बेटियां, कार्यक्रम से बढ़ा मनोबल
छात्रा नेहा चौहान ने ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन से छात्राओं में नई ऊर्जा का संचार होता है, उनका मनोबल बढ़ता है। छात्रा लवी प्रजापति ने स्वरचित कविता के माध्यम से नारी सशक्तीकरण के बारे में प्रकाश डाला। समीक्षा सैनी का कहना है कि जब से मिशन शक्ति टीम ने काम शुरू किया है, समाज में जागरूकता आई है। सोनाक्षी रानी का कहना है कि महिलाओं का अधिकारों के प्रति जागरूक होना बेहद जरूरी है। उन्नति अग्रवाल का कहना है कि जब तक हम सभी जागरूक होकर अपने अधिकारों को नहीं समझेंगे, तब तक महिलाओं का सशक्त होना बेमानी ही होगा।
शिक्षिकाओं ने भी बढ़ाया छात्राओं का उत्साह
शिक्षका अपर्णा रानी का कहना है कि पुलिस की पाठशाला का आयोजन समाज के लिए जरूरी है। इससे छात्राओं को घर से बाहर निकल कर और मेहनत के साथ पढ़ाई करने में बल मिलेगा। पूर्णिमा शर्मा का कहना है कि छात्राओं को खेलों के लिए भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। अलका रानी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से महिलाओं का डर भागता है। अनीता भटनागर का कहना है कि ऐसे कार्यक्रमों से समाज में जागरूकता आती है। रेनू कुमारी का कहना है कि ऐसे कार्यक्रम एक अच्छे समाज की कल्पना को साकार करने के लिए जरूरी हैं।