कानपुर में पुलिस कर्मियों की हत्या के मामले के मुख्य आरोपी विकास दूबे की गिरफ्तारी को बार्डर पर ?
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दरोगा की गलत सूचना पर दौड़ती रही पुलिस
बिजनौर। ढाई लाख के इनामी विकास दुबे आखिर कहां चला गया किसी को नहीं पता। रात भर पुलिस उसकी तलाश में खाक छानती रही। पूरे जिले की नाकेबंदी कर दी गई पर पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा। आईबी के एक दरोगा की सूचना पर पुलिस ने विकास दुबे को दबोचने के लिए जाल बिछाया था। अब पुलिस अफसर मान रहे हैं कि दरोगा ने विकास दुबे की फर्जी सूचना दी थी।
सोमवार को दिन में एक दरोगा ने पुलिस अफसरों के साथ कंट्रोल रूम को सूचना दी थी कि एक स्कोर्पियो में अपने तीन साथियों के साथ उन्होंने कुख्यात अपराधी विकास दुबे को बैठे देखा है। विकास दुबे के पीछे स्कोर्पियो में उसके चार साथी थे। इस सूचना पर जिले की पुलिस अलर्ट हो गई। पूरे जिले की नाकाबंदी कर दी गई और चेकिंग अभियान शुरू कर दिया गया। उत्तराखंड से लगी सभी सीमाओं पर भी चौकसी बढ़ा दी गई। पूरी रात चेकिंग अभियान चला पर कहीं विकास दुबे नहीं मिला। पुलिस पर तमाम सवाल खड़े होते रहे कि आखिर विकास दुबे कहां चला गया। सूचना के तुरंत बाद जिले भर की पुलिस अलर्ट हो गई व दो गाड़ियों के साथ कहां समा गया। चर्चा यह भी रही कि हरिद्वार के रास्ते वह उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश कर गया है। पूरी रात खाक छानने के बाद विकास का कोई पता नहीं चला तो पुलिस परेशान हो गई। यूपी 15 व यूपी 30 नंबर की गाड़ियों को खंगालना शुरू किया पर कोई नतीजा नहीं मिला। हालांकि पुलिस ने मंगलवार को भी जिले भर में चेकिंग अभियान चलाया। बैराज से आने जाने वाले वाहनों को बिजनौर के अलावा मुजफ्फरनगर जिले की रामराज पुलिस खंगालती रही। बिना तलाशी के किसी वाहन को नहीं गुजरने दिया पर विकास दुबे पुलिस के हाथ नहीं लगा। रात भर पुलिस के आला अफसर मीडिया को इस बारे में कुछ भी पुख्ता जानकारी देने से बचते रहे। एसपी सिटी लक्ष्मीनिवास मिश्रा के मुताबिक विकास दुबे के मामले में लगता है दरोगा ने फर्जी सूचना दी थी। पूूरी रात पुलिस विकास दुबे की तलाश में जुटी रही। दरोगा के खिलाफ कार्रवाई इसलिए नहीं हुई क्योंकि वह उनके विभाग का नहीं है। दरोगा की झूठी सूचना की वजह से यह सब बखेड़ा खड़ा हुआ है।