‘निस्तारण से पहले सुनी जाए दलील’
बिजनौर। त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण के एक फैसले ने दावेदारों का खेल बिगाड़ दिया है। अब दावेदारों की निगाह आज होने वाले आपत्तियों के निस्तारण पर है। इसके लिए आपत्ति देने वालों ने जुगाड़बाजी की कोशिश तेज कर दी हैं। प्रधान पद के वे दावेदार सबसे अधिक सक्रिय हैं जिनकी पंचायत में आरक्षित श्रेणी के वोट बहुत कम हैं। बुधवार को विकास भवन में मौजूद अनेक दावेदारों का कहना था कि उनकी पंचायत में अनुसूचित जाति के एक दो परिवार हैं। वे भी बाहर नौकरी करते हैं। आपत्ति का निस्तारण करने से पहले आपत्ति देने वाले की दलील सुनी जाए।
प्रधान पद का चुनाव लड़ने वाले दावेदार सालों से तैयारी कर रहे थे, लेकिन आरक्षण नीति ने उनका खेल बिगाड़ दिया है। जिले में 1123 ग्राम पंचायत हैं। इनमें अनुसूचित जनजाति के लिए एक, अनुसूचित जाति के लिए 250, ओबीसी के लिए 304, महिलाओं के लिए 185 पंचायत आरक्षित हुई हैं। शासन ने आरक्षण नीति में यह निर्णय लिया था कि 1995 से 2015 तक एक बार भी आरक्षित नहीं होने वाली पंचायत पहले अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होंगी। आरक्षण का यही फैसला दिग्गजों के लिए भारी पड़ रहा है। परेशान हाल दावेदार फैसले के खिलाफ कोई भी दांव नहीं छोड़ रहे हैं। अब दावेदार सियासी दांव पेंच में लगे हैं। दावेदारों के अनुसार वर्ष 2021 में बहुत सी ऐसी पंचायत आरक्षित हुई हैं जिनमें अनुसूचित जाति के वोटरों की संख्या बहुत कम है।
दावेदारों ने अभी उम्मीद नहीं छोड़ी है। वे कानूनी सलाह लेने के साथ जुगाड़बाजी में भी लगे हैं। बुधवार को विकास भवन में मौजूद अनेक दावेदारों का कहना था कि उनकी पंचायत में अनुसूचित जाति के एक दो परिवार हैं। वे भी बाहर नौकरी करते हैं। आपत्ति का निस्तारण करने से पहले आपत्ति देने वाले की दलील सुनी जाए। शासन से आरक्षण की पूरी प्रक्रिया निश्चित है। 10 मार्च से आपत्तियों का निस्तारण शुरू हुआ है। कुल 565 आपत्ति हैं। इनमें प्रधान पद की सबसे अधिक 437 हैं। इसके बाद जिला पंचायत सदस्य पदों पर 75 आपत्ति हैं।
जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत सदस्य के लिए भी मच खलबली
जिला पंचायत अध्यक्ष जिले का प्रथम नागरिक होता है। इसलिए जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव महत्वपूर्ण होता है। चुनाव में जिला पंचायत सदस्य भाग लेते हैं। जिला पंचायत सदस्य की 56 सीट हैं। इसलिए जिला पंचायत अध्यक्ष के दावेदार एक-एक सीट पर निगाह रखते हैं। दावेदार आपत्तियों के निस्तारण पर निगाह रख हुए हैं। क्षेत्र पंचायत सदस्य की 37 आपत्ति हैं। क्षेत्र पंचायत सदस्य ब्लॉक प्रमुख चुनते हैं। हर ब्लाक का एक प्रमुख होता है। प्रमुख पदों के दावेदार अपने पक्ष के लोगों को सदस्य बनाना चाहते हैं। इसलिए वे आपत्तियों के निस्तारण को लेकर पूरी तरह चौकस है। इस बार प्रमुख पद के आरक्षण पर भी तीन आपत्ति हैं। डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि शासन के निर्देशों के अनुपालन में डीएम रमाकांत पांडेय की अध्यक्षता वाली चार सदस्यीय समिति आज आपत्तियों का निस्तारण करेगी। आपत्तियां बड़ी संख्या में हैं, इसलिए समय लगेगा। हर आपत्ति पर निस्तारण का कारण अंकित होता है।