अंधेरे में रहने के आदी थे बसपा और सपा के लोग : मुख्यमंत्री
बिजनौर। दस दिन में दूसरी बार बिजनौर पहुंचे सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब मुजफ्फरनगर में दंगे हो रहे थे, तब दो लड़कों की जोड़ी गायब थी। एक लखनऊ से दंगा करा रहा था और दूसरा दिल्ली से तमाशा देख रहा था। यह बातें कहकर सीएम योगी ने नाम लिए बगैर ही अखिलेश यादव और चौधरी जयंत सिंह पर तंज कसा। पांच हजार साल पहले महात्मा विदुर ने बिजनौर को अपना केंद्र बनाकर अपनी नीति के माध्यम से उस समय की शासन व्यवस्था के कुछ महत्वपूर्ण रहस्यों का उद्घाटन किया था। महात्मा विदुर के नाम पर बन रहा मेडिकल कॉलेज जिले में स्वास्थ्य सुविधा का सशक्त माध्यम बनेगा।
उन्होेंने कहा कि याद करिए, पांच साल पहले उत्तर प्रदेश की स्थिति क्या हुआ करती थी। दंगा, कर्फ्यू, पलायन यहां की नियति बन चुकी थी। त्योहार से पहले यहां दंगा होता था। महीनों तक चलने वाला कर्फ्यू लगता था। जिससे व्यापारिक प्रतिष्ठान और आम जन जीवन पूरी तरह त्रस्त होता था। बेटी की सुरक्षा खतरे में, कोई महिला बाजार नहीं जा सकती थी, कोई अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा था। व्यापारी पालन कर रहा था, गुंडागर्दी चरम पर थी। सत्ता प्रायोजित गुंडागर्दी से हर आदमी त्रस्त था। अब पांच साल से कोई दंगा नहीं हुआ। पांच सालों में सुरक्षा का एक बेहतर माहौल बनाने का कार्य हुआ। जितने भी माफिया और अपराधी तत्व थे, उनको इस स्थिति में मजबूर कर दिया गया कि अपराधी गले में तख्ती लटकाकर जान की भीख मांगने को मजबूर हैं। यह कहते हुए सुना होगा, जान बख्श दो मैं ठेला चलाकर पेट भर लूंगा, लेकिन अपराध नहीं करूंगा। यह काम सपा और बसपा की भी सरकारें कर सकती थीं, लेकिन नहीं, इन्होंने अराजकता को बढ़ाया। पांच साल पहले उत्तर प्रदेश में सड़के नहीं बनती थीं, राह चलते राहगीरों से राहजनी जरूर हो जाती थी। अब पांच वर्ष के दौरान डबल इंजन सरकार ने इस नरक से मुक्ति दिलाकर एक बार फिर से यहां पर विकास और सुशासन की नींव डालकर हरेक चेहरे पर खुशहाली लाने का काम किया है।
मंच पर ये रहे मौजूद
मंच पर सीएम योगी के साथ साथ भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष मोहित बेनीवाल, परिवहन मंत्री अशोक कटारिया, जिला अध्यक्ष सुभाष वाल्मीकि, विधायक सूचि चौधरी, विधायक कमलेश सैनी, विधायक अशोक राणा, पूर्व सांसद कुंवर भारतेंद्र सिंह, पूर्व सांसद डॉ. यशवंत सिंह, विधायक ओमकुमार, विधायक सुशांत सिंह, सीपी सिंह मौजूद रहे।