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अभिभावकों को अब भी कोरोना का डर

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अभिभावकों को अब भी कोरोना का डर
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बिजनौर। सभी बोर्ड के स्कूलों को दस फरवरी से नियमित रूप से खोलने के आदेश हो गए हैं, लेकिन अभिभावक अभी कोरोना के डर से उबर नहीं पाए हैं। वे अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं हैं। कहना है कि कोरोना का टीकाकरण होने के बाद ही कक्षाओं को नियमित खोला जाए।
जिले में यूपी बोर्ड के 387, सीबीएसई के 101, आईसीएसई के सात तथा संस्कृत बोर्ड का एक विद्यालय हैं। कोरोना के कारण सभी स्कूल मार्च महीने से बंद थे। शासन ने छात्रों की पढ़ाई के नुकसान की भरपाई के लिए ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कराई थी। करीब सात माह बाद अक्टूबर में स्कूल कक्षा नौ से बारह तक के लिए खोले गए। इसके लिए अभिभावकों की सहमति लेना अनिवार्य किया गया था। स्कूलों का शैक्षणिक सत्र 31 मार्च को समाप्त होगा, ऐसे में शासन ने सभी बोर्ड के स्कूल नियमित रूप से खोलने को कहा है। स्कूल भी इसकी तैयारी में जुटे हैं, परंतु अभिभावकों का कहना है कि कोरोना का संकट अभी टला नहीं है। उनका कहना है कि कोरोनारोधी टीकाकरण पूर्ण होने के बाद ही स्कूलों में नियमित कक्षाओं का संचालन शुरू होना चाहिए। अभिभावक संघ के जिलाध्यक्ष नृपेंद्र देशवाल का कहना है कि प्रशासन को नियमित कक्षाओं के संचालन के लिए टीम भेजकर कोरोना से बचाव की व्यवस्थाओं की जांच करानी चाहिए।
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यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों को नहीं मिला ऑनलाइन पढ़ाई का लाभ
यूपी बोर्ड के स्कूलों में करीब सवा लाख और सीबीएसई, आईसीएसई के स्कूलों में एक लाख से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। यूपी बोर्ड के स्कूलों में करीब चालीस हजार छात्र ही ऑनलाइन पढ़ाई से जुड़े। अभिभावक रजनीश कुमार, डॉ. नरेंद्र कुमार का कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई को प्रभावी बनाना जरूरी है। सीबीएसई के स्कूलों में छात्रों ने ऑनलाइन पढ़ाई में अधिक दिलचस्पी ली। माडर्न एरा पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या सीमा विश्वास बताती हैं कि ऑनलाइन पढ़ाई नियमित चल रही है।
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