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तीन वोट पर ही आरक्षित कर दी पंचायत

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तीन वोट पर ही आरक्षित कर दी पंचायत
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बिजनौर। ग्राम पंचायत सल्लाहपुर में अनुसूचित जाति के पांच वोट हैं, इनमें से दो वोट गांव में रहते नहीं हैं। अन्य जाति के पंचायत में दो हजार से अधिक वोटर हैं। लेकिन इन तीन वोट पर ही पंचायत को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया है। आरक्षण को लेकर ग्रामीण लामबंद होने शुरू हो गए हैं। मामला नहीं सुलझने पर ग्रामीण चुनाव का बहिष्कार करने तक का निर्णय ले सकते हैं।
मामला हल्दौर ब्लॉक की ग्राम पंचायत सल्लाहपुर का है। पंचायत में 99 प्रतिशत जाट और मुस्लिम आबादी है। पंचायत में 2192 वोटर हैं। वर्ष 2021 चुनाव में पंचायत का प्रधान पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है। आरक्षण को लेकर सैकड़ों ग्रामीणों की हस्ताक्षर वाली आपत्ति दर्ज कराई गई है।
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आपत्ति में कहा गया है कि पंचायत में अनुसूचित जाति के मात्र पांच वोट हैं। इनमें ऊषा देवी पत्नी राहुल तथा राहुल पुत्र मगन सिंह गांव सल्लाहपुर में नहीं रहते हैं। दोनों अपने परिवार के साथ ग्राम शादीपुर में रहते हैं। कहा गया है कि पिछड़ी जाति बाहुल्य पंचायत को मात्र तीन एससी वोट के आधार पर एससी आरक्षित करना गलत है। पूर्व ब्लॉक उप प्रमुख नसीमुद्दीन अंसारी का आरोप है कि आरक्षण में जमकर अनियमितताएं हुई हैं। ग्रामीणों को आरक्षण के मामले में इंसाफ नहीं मिलता है तो ग्रामीण चुनाव बहिष्कार का निर्णय भी ले सकते हैं।
तीनों सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित
बिजनौर। पूर्व ब्लॉक उप प्रमुख नसीमुद्दीन अंसारी बताते हैं कि वर्ष 2015 के त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव में सल्लाहपुर गांव जिस क्षेत्र में शामिल है, वह बीडीसी सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। इस बार भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित की गई है। इसी प्रकार जिला पंचायत की सीट भी वर्ष 2015 में एससी को रिजर्व थी। इस बार भी सीट एससी को आरक्षित है। प्रधान का पद भी अनुसूचित जाति को आरक्षित कर दिया गया है। इस प्रकार तीनों पद एससी प्रत्याशी के लिए आरक्षित हो गई है।
आरक्षण प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं हैं ग्रामीण
हल्दौर। ब्लॉक कार्यालय पर आपत्ति पत्र के दूसरे दिन गांव उमरी पीर में पिछड़ा वर्ग की सीट आरक्षित है। ग्रामीणों ने पिछड़ा वर्ग के स्थान पर अनारक्षित सीट के लिए आपत्ति पत्र दाखिल किए। जुल्फिकार आदि लोगों द्वारा दिए गए आपत्ति पत्र में बताया कि गांव में 96 प्रतिशत सामान्य वर्ग की आबादी है। जबकि चार प्रतिशत लोग अन्य जातियों के है। ग्रामीणों ने शुक्रवार को पिछड़ा वर्ग के स्थान पर अनारक्षित सीट के लिए आपत्ति पत्र दाखिल किए। गांव करीबनगर उर्फ उलेढ़ा में ग्राम प्रधान पद के लिए अनुसूचित जाति की सीट आरक्षित की गई है। छत्रपाल सिंह, रामफल सिंह, रामौतार सिंह प्रदीप सिंह आदि ग्रामीणों ने कहा कि गांव में पिछड़ा वर्ग की 91 प्रतिशत, सात प्रतिशत सामान्य व दो प्रतिशत अनुसूचित जाति की आबादी है। गांव सल्लाहपुर के ग्रामीणों ने आरक्षित अनुसूचित जाति की सीट में संशोधन कर आपत्ति पत्र दाखिल किए। एडीओ पंचायत सुरेंद्र सिंह ने उक्त दो आपत्ति पत्र दाखिल कराए जाने की पुष्टि की है।
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आपत्तियों की संख्या बढ़कर 189 हुई
बिजनौर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव आरक्षण में आपत्ति दर्ज कराने को लेकर तेजी आ गई है। दूसरे दिन जिला पंचायतराज दफ्तर पर प्रधान व जिला पंचायत सदस्य की 155 आपत्ति दर्ज हुई हैं। दो दिन में कुल 189 आपत्ति आई हैं। सबसे अधिक आपत्ति प्रधान पदों पर हैं। एडीपीआरओ संदीप अग्रवाल ने बताया कि दूसरे दिन प्रधान पदों पर 127 तथा जिला पंचायत सदस्य पदों पर 28 आपत्ति दर्ज कराई गई है। बताया कि पहले दिन डीपीआरओ दफ्तर में प्रधान पद पर पर 25 तथा जिला पंचायत सदस्य पद पर नौ आपत्ति आई थी। इस प्रकार दोनों दिन की डीपीआरओ दफ्तर में आई आपत्ति प्रधान पद की 152 तथा तथा जिला पंचायत सदस्य की 37 आपत्ति हो गई है। आपत्ति देने के लिए ब्लॉक , डीपीआरओ, सीडीओ व डीएम कार्यालय केंद्र हैं।
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