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प्रशासन की किलेबंदी के सामने फ्लॉप हुई पंचायत

Sat, 19 Aug 2017 12:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
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अन्याय विरोधी संघर्ष समिति की पंचायत को संबोधित करते जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर। प्रशासन की किलेबंदी के सामने अन्याय विरोधी संघर्ष समिति की पंचायत फ्लॉप हो गई। पंचायत में उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं पहुंची। पंचायत में आयोजकों व वक्ताओं ने किसान जसवंत सिंह की मौत के लिए प्रशासनिक अधिकारियों व पूर्व सपा विधायक रुचि वीरा को जिम्मेदार ठहराया। अफसरों के आश्वासन के बाद कलक्ट्रेट में प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन स्थगित कर दिया गया। किसान जसवंत सिंह व जिला पंचायत सदस्य धारा सिंह के अपहरण के मामले में रुचिवीरा की गिरफ्तारी के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। 22 अगस्त को कलक्ट्रेट में होने वाली महापंचायत भी स्थगित कर दी गई है। एक सप्ताह में कार्रवाई न होने पर 25 अगस्त को जेल भरो आंदोलन करने का एलान किया गया। 
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  किसान जसवंत सिंह की मौत के मामले में नामजदों की गिरफ्तारी के लिए अन्याय विरोधी संघर्ष समिति ने शुक्रवार को सहकारी गन्ना समिति कार्यालय में पंचायत बुलाकर बाद में कलक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन करने का एलान किया था। प्रशासन ने इस धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। प्रशासन ने इसे देखते हुए पूरे जिले में धारा 144 लागू कर दी थी। दूसरे जिलों से पुलिस के अलावा पीएसी भी बुलाई गई थी। शुक्रवार को प्रदर्शनी चौक से लेकर विकास भवन तक भारी पुलिस व पीएसी बल तैनात रहा। कलक्ट्रेट व गन्ना समिति में चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात कर इलाका छावनी में तब्दील कर दिया गया। प्रशासन की किलेबंदी के चलते गन्ना समिति कार्यालय पर किसानों की ज्यादा भीड़ नहीं आई। पंचायत में किसानों ने किसान जसवंत सिंह की मौत के लिए अफसरों व पूर्व विधायक रुचि वीरा को जिम्मेदार बताया। समिति अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने कहा कि जसवंत सिंह की मौत का जिम्मेदार जिले का प्रशासन है। जिले के नुमाईंदे हमारे वोटों से हम पर राज कर रहे हैं और अपने असर से हमारे निर्दोष साथियों को झूठे मुकदमों में फंसाकर उनकी हत्या करा रहे हैं। पंगु प्रशासन ऐसे लोगों के दबाव में आ जाता है। अपहरण और एससीएसटी एक्ट के आरोपियों को छुआ तक नहीं और निर्दोषों को जेल में डाल देता है। निर्दोष भाइयों की हत्या पर कोई पूछने वाला नहीं है। कहा कि लाशों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जिले में भारी पुलिस बल बुलाने को लेकर कहा कि प्रशासन को पता है कि उन्होंने अन्याय किया, इसलिए आसपास के जिलों से फोर्स मंगाई है।

केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान उनके वोटों से जीते हैं, वे जसवंत सिंह के परिवारवालों को न्याय दिलाकर दिखाएं। उन्होंने रुचि वीरा की गिरफ्तारी के लिए दो दिन का समय मांगा था, लेकिन जनता ने उनको चार दिन का समय दिया पर हुआ कुछ नहीं। अगर बिना किसी रिपोर्ट के प्रशासन जसवंत सिंह को गिरफ्तार कर सकता है अपहरण में नामजद रुचि वीरा को क्यों नहीं। सेवानिवृत्त सीओ एमपी सिंह ने कहा कि अगर प्रशासन 31 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव पर कार्रवाई करा देता तो सब ठीक रहता। राष्ट्रीय किसान मजदूर पार्टी प्रदेश महासचिव कैलाश लांबा ने कहा कि अगर किसी मामले में सात साल से कम की सजा होने पर आरोपी की गिरफ्तारी का आदेश नहीं है तो फिर बिना रिपोर्ट दर्ज किए किसी को तीन दिन थाने में किसी को बैठाकर रखने का आदेश भी नहीं है। सुरपाल सिंह ने कहा कि अगर इंसाफ न मिला तो जिले में किसी भी अधिकारी को कार्यालय में नहीं बैठने दिया जाएगा।  भाकियू के युवा जिलाध्यक्ष लाल सिंह ने कहा कि जिले में दो कानून चल रहे हैं। पंचायत की अध्यक्षता सरदार प्रीतम सिंह व संचालन वीरेंद्र सिंह ने किया। धरने में अनुज मलिक, धर्मवीर सिंह धनकड़, ओमपाल सिंह, बाबूराम तोमर, यादराम चंदेल, जय सिंह, वीरेंद्र सिंह, संजीव राठी, महावीर सिंह, कल्याण सिंह, चंद्रधर शर्मा आदि मौजूद रहे। 
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पौने चार घंटे चली पंचायत 
किसानों की पंचायत सुबह दस बजे शुरू हो गई। करीब साढ़े 12 बजे अधिकारियों को पंचायत में आकर अपना पक्ष रखने को कहा गया। ऐसा न होने पर कलक्ट्रेट कूच करने की चेतावनी दी गई। एडीएम प्रशासन मदन सिंह गर्ब्याल, एसपी सिटी रामधारी चौरसिया, एसपी देहात दिनेश सिंह, एसडीएम सत्येंद्र कुमार, सीओ सिटी असित श्रीवास्तव पंचायत में पहुंचे। उन्होंने समिति सदस्यों व किसानों से वार्ता की। वार्ता के बाद अधिकारियों व समिति पदाधिकारियों ने किसानों को संबोधित किया। अफसरों को कार्रवाई के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। करीब पौने दो बजे पंचायत स्थगित कर दी गई। उन्होंने किसानों से अपना पक्ष बताते हुए यह बातें कहीं।

निष्पक्ष कार्रवाई कर रहे : एडीएम 
एडीएम प्रशासन मदन सिंह गर्ब्याल ने कहा कि किसान जसवंत सिंह की मौत की मजिस्ट्रीयल जांच कराई जा रही है। इस मामले में गवाही भी ली जा रही है। मजिस्ट्रीयल जांच में सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई कर रहा है। 

कुछ गलतियां हुईं, उन्हें सुधारेंगे : एसपी देहात 
एसपी देहात दिनेश सिंह ने कहा कि इस मामले में कुछ गलतियां हुई हैं। उनको सुधारने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि वे भी किसान के बेटे हैं और किसानों का दर्द समझते हैं। कहा कि जिला पंचायत सदस्य धारा सिंह के अपहरण के मामले में विवेचक को बदला गया है। इस मामले में पुख्ता सबूत अगर उपलब्ध कराए जाएं तो सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। 
निर्दोषों को निकालेंगे : सीओ 
सीओ सिटी असित श्रीवास्तव ने कहा कि प्रशासन किसी के दबाव में काम नहीं कर रहा है। इस मामले में विवेचना में सीसीटीवी फुटेज को भी शामिल किया गया है, जिनके नाम भी गलत तौर से शामिल हो गए हैं, उन्हें जांच में निकाला जाएगा। जिला पंचायत सदस्य धारा सिंह के मामले में जांच के बाद ही अपहरण की धारा हटाई गई है। अगर किसी के पास इस मामले में सबूत है तो वह उपलब्ध कराएं। 

प्रशासन के सामने रखीं ये मांगें 
-जसवंत सिंह को बिना जुर्म के थाने लाने वाला दरोगा सस्पेंड हो। 
-धारा सिंह अपहरण कांड से अपहरण की धारा हटाने वाले सीओ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो। 
-जसवंत सिंह की मौत के जिम्मेदार आरोपी गिरफ्तार हों। 
-जसवंत सिंह की मौत की जांच एक सप्ताह में पूरी हो। 

कानूनी पक्ष मजबूत करेंगे : राजेंद्र सिंह 
समिति जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह के ने कहा कि किसानों को कानूनी रूप से अपना पक्ष मजबूत रखना है। अधिकारियों ने मामले में कार्रवाई के लिए एक सप्ताह का दिया गया है। 22 अगस्त को कलक्ट्रेट में होने वाली महापंचायत स्थगित कर दी गई है, लेकिन समिति अविश्वास प्रस्ताव पर 22 अगस्त को होने वाले मतदान पर पूरी नजर रखेगी। अगर किसी ने मतदान में गड़बड़ करने की कोशिश की तो समिति कलक्ट्रेट व डीएम आवास पर धावा बोलेगी। अगर प्रशासन ने जसवंत सिंह की मौत में इंसाफ न किया तो 25 अगस्त को कलक्ट्रेट में महापंचायत की जाएगी। एक हजार किसान 25 अगस्त को एक हजार किसान 26 अगस्त को गिरफ्तारी देंगे। 

भाजपाइयों ने बनाई दूरी 
किसान जसवंत सिंह की मौत के मामले में धरने प्रदर्शनों में शामिल होने के मामले में भाजपा पूरी तरह बैकफुट पर आ गई है। इस मामले में हो रहे धरना प्रदर्शन में सांसद भारतेंद्र सिंह के अलावा कई भाजपा नेता भाग ले रहे थे। लेकिन शुक्रवार को गन्ना समिति में हुई पंचायत में कोई भाजपा नेता नजर नहीं आया। भाजपा नेता व कार्यकर्ता इस पंचायत से दूरी ही बनाए रहे। हालांकि भाजपा नेता पंचायत में आए अपने साथियों से पल-पल की जानकारी लेते रहे। 

छावनी बना इलाका 
पंचायत के दौरान पूरा इलाका छावनी में तब्दील रहा। प्रदर्शनी मैदान से लेकर विकास भवन तक पुलिस बल तैनात रहा। सुबह के समय कर्मचारियों के अलावा किसी को भी कलक्ट्रेट के अंदर नहीं जाने दिया गया। अधिकारी पूरे एरिया में पुलिस बल के साथ फ्लैग मार्च निकालते रहे। हालांकि गन्ना समिति में आने-जाने के लिए कोई पाबंदी नहीं लगाई गई थी। कलक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन न शुरू होने से अफसरों ने राहत की सांस ली है। प्रदर्शनी मैदान व विकास भवन के पास बैरियर लगाकर बड़े वाहनों को वहां से नहीं गुजरने दिया गया। 

भीड़ न आने की टीस दिखी 
गन्ना समिति में होने वाली पंचायत में अधिक से अधिक भीड़ जुऱ्टाने के लिए कई दिन से प्रचार किया जा रहा था। अन्याय विरोधी संघर्ष समिति के अलावा रालोद व भाकियू नेता प्रचार में लगे हुए थे। लेकिन पंचायत में भीड़ न आने की टीस इन सबके चेहरे पर भी दिखाई दी। कई वक्ताओं ने कहा कि पता नहीं लोग क्यों घर से नहीं निकल रहे हैं। भीड़ कम आने को लेकर जनता भी बात करती रही। कुछ लोग आपस में कहते रहे कि यह मामला राजनीतिक है और इसे जबरन जसवंत सिंह की मौत से जोड़ा जा रहा है। 

नहीं पहुंच सके जयंत 
पंचायत में रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी के आने की भी चर्चा चलती रही। जयंत चौधरी को किसान जसवंत सिंह के घर भी जाना था, लेकिन मेरठ में ही उनकी गिरफ्तारी होने के कारण वे नहीं आ सके। पुलिस ने बिजनौर के पूर्व सांसद मुंशीराम पाल, राहुल सिंह व जिलाध्यक्ष अशोक चौधरी को भी मेरठ में गिरफ्तार किया है। रालोद के विधि प्रकोष्ठ प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण सिंह देशवाल ने जयंत चौधरी को मेरठ में गिरफ्तार करने की निंदा की है। 
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