बिजनौर। यूं तो चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है मगर फिर भी अप्रैल में पंचायत चुनाव होने के अनुमान पर ही गांव की राजनीति गर्माई हुई है। अब पंचायत चुनाव टलने की अटकलों के बीच संभावित उम्मीदवारों की धड़कन बढ़ चुकी हैं। अगर चुनाव अगले दो तीन महीनों में नहीं हुआ तो फिर एक साल तक संघर्ष करना पड़ेगा।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को प्रशासन अपने स्तर पर तैयारियों को अंतिम रूप देने में लगा हुआ है। बाकायदा बैलेट पेपर भी छापे जा रहे हैं। मतदाता सूची को लेकर का भी काम चल रहा है। इन तैयारियों के बीच पंचायत चुनाव अपने तय समय पर नहीं होने की चर्चाएं भी चल रही है। राजनीति के जानकार भी अब यह मानने लगे हैं।
बता दें कि गांव गांव में यह साफ हो चला था कि चुनावी मैदान में कौन कौन उम्मीदवार आएगा। ग्राम प्रधान, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्य पद के लिए संभावित उम्मीदवारों ने प्रचार तेज कर दिया। कुछ उम्मीदवारों ने बाकायदा पोस्टर भी चस्पा कर दिए थे। उधर प्रधान पद के लिए ताल ठोंकने वाले संभावित लोगों ने मतदाताओं की चौखट पर पहुंचकर हाल चाल जानना शुरू किया। इसके साथ ही सुख दुख में भी शामिल होने लगे।
कुछ गांव में तो संभावित उम्मीदवारों ने रकम भी खर्च चालू कर दी थी। अब चुनाव टलने की संभावनाओं के बीच धड़कने बढ़ी हुई हैं क्योंकि अगर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब नहीं हुआ तो फिर एक साल भी आगे खिसक सकता है। ऐसे में मतदाताओं की मान मनौव्वल का सिलसिला बनाए रखने में भी दिक्कत रहेगी।