142 क्रेशरों में से केवल आठ इकाइयों ने भरा दम
धामपुर। क्षेत्र में 142 क्रेशरों में से अभी तक केवल आठ खांडसारी इकाइयां ही बमुश्किल चालू हो सकी हैं। क्रेशर मालिकों का कहना है कि जब सरकार की ओर से उनकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। महंगाई, चीनी मिलों की हो रही बढ़ोत्तरी के बीच खांडसारी इकाइयों को जीवित रखना उनके लिए चुनौती हो गया है।
धामपुर सहायक चीनी आयुक्त क्षेत्र में तीन तहसीलें धामपुर, चांदपुर और ठाकुरद्वारा शामिल हैं। इन तीनों तहसीलों में 142 लोगों के पास खांडसारी इकाइयों के लाइसेंस है, लेकिन अभी तक आठ इकाइयां ही चालू हो सकीं है। विभाग की ओर से बंद इकाइयों को चालू कराने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन क्रेेेशर मालिक इन्हें चालू करने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं। सहायक चीनी आयुक्त नीरज कुमार का कहना है कि पिछले साल अब तक 31 इकाइयां चालू हो गई थीं। जिन्होंने पूरे पेराई सत्र में माह अप्रैल तक करीब 21 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर लगभग 0.15 लाख क्विंटल रॉब और दो लाख 39 हजार क्विंटल गुड़ का उत्पादन किया था। अबकी बार गन्ने की खरीद अपेक्षा से कम है। क्रेशरों की ओर से गन्ने को 260 से 265 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से खरीदा जा रहा है।
नकद भुगतान फिर भी गन्ना आपूर्ति कम
नहटौर उत्सव इंटर प्राइेजज के मालिक शिल्पी अग्रवाल का कहना है कि जब चीनी मिलों में गन्ने का भाव 325 रुपये प्रति क्विंटल है, तो ऐसे में किसान क्रेशरों को गन्ना बेचना पसंद नहीं करते। जबकि क्रेशरों की ओर से किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान नकद किया जा रहा है। सहायक चीनी आयुक्त नीरज कुमार का कहना है कि उनके क्षेत्र में तीन तहसीलों की पांच चीनी मिल धामपुर, स्योहारा, चांदपुर, अफजलगढ़ और रानी नांगल शामिल है। अधिकारियों की ओर से गन्ना घटतौली पकड़ने को अब तक 22 चेकिंग हो चुकी है। अभी तक कहीं पर गड़बड़ी नहीं पकड़ में आई। पिछले सत्र में पूरे साल 1955 चेकिंग हुई थी। सात गन्ना क्रय केंद्रों पर सामान्य प्रकार की गड़बड़ियां पाई गई थी। संबंधित चीनी मिलों की 78 हजार की जमानतों को जब्त किया गया था।