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Bijnor News: मुकदमों को स्थानांतरित करने का आदेश निरस्त

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- मंडलायुक्त ने धामपुर एसडीएम और न्यायिक कोर्ट के वाद ठाकुरद्वारा स्थानांतरित करने का जारी किया था आदेश
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- मंडलायुक्त से मिले थे अधिवक्ता, तहसीलदार का स्थानांतरण आदेश जारी

संवाद न्यूज एजेंसी
धामपुर (बिजनौर)। मुरादाबाद मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने सात अगस्त को जारी धामपुर उप जिलाधिकारी एवं उप जिलाधिकारी (न्यायिक) कोर्ट के सभी मुकदमों को मुरादाबाद जिले की ठाकुरद्वारा तहसील में स्थानांतरित करने के अपने आदेश को निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही तहसीलदार, तहसीलदार (न्यायिक) और सभी चारों नायब तहसीलदारों की कोर्ट के करीब एक हजार से ज्यादा वादों को नगीना तहसील में स्थानांतरित किया गया था। इस पर भी रोक लगा दी गई है। उन्होंने धामपुर तहसीलदार धनराज कुमार का भी तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण करने का आदेश जारी किया है।

आदेश को निरस्त कराने की मांग को लेकर बुधवार को धामपुर बार एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल मुरादाबाद में मंडलायुक्त से मिला था। अधिवक्ताओं ने आदेश पर खुशी जताई है। सात अगस्त को जारी हुए आदेश को लेकर अधिवक्ताओं का कहना था कि वादों के स्थानांतरण से उन्हें भारी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। अधिवक्ताओं का प्रतिनिधिमंडल बुधवार को मुरादाबाद में मंडलायुक्त से मिला। उन्हें अधिकारियों की कार्यशैली के बारे में अवगत कराया गया।
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मंडलायुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से धामपुर तहसीलदार धनराज कुमार को हटाने के आदेश जारी कर दिए। कमिश्नर ने अधिवक्ताओं को सुझाव दिया कि वे मेहनत के साथ वादकारियों को सस्ता और सुलभ न्याय दिलाएं। जिससे वादकारियों का भला हो सके। प्रदेश सरकार की भी ऐसी मंशा है। कमिश्नर से मिलने वालों में बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विनोद कुमार सैनी, सचिव देवेंद्र कुमार, शाहिद अली, राजपाल सिंह, विनय कुमार गुप्ता, राकेश मित्तल, सुरेंद्र कुमार व कमिश्नरी बार के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कुमार, देवेश चौहान आदि शामिल रहे।
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गलत कार्यों को कराने के लिए दबाव डालते हैं अधिवक्ता : तहसीलदार
तहसीलदार धनराज कुमार का कहना है कि उन्हें स्थानांतरण के संबंध में जानकारी नहीं है। जो भी आदेश होगा, उसका अनुपालन किया जाएगा। तहसीलदार का कहना है कि अधिवक्ता गलत कार्यों को कराने के लिए दबाव डालते हैं। जो संभव नहीं है। इसी बात को लेकर अधिवक्ता अधिकारियों के खिलाफ हड़ताल करते हैं। इसकी वजह से मुकदमों की सुनवाई में दिक्कत पैदा होती है। वादकारियों का नुकसान होता है।
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