मदरसा में आयोजित जलसे को संबोधित करते मौलाना शाहनवाज।
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जलालाबाद में मदरसे दीन की रीढ़ हैं। मदरसों से ही दीन कायम है। मदरसों का एहतराम करना और मदरसों की तरक्की के लिए काम करने की जिम्मेदारी समाज को अपने कंधों पर लेनी है। मदरसा अख्तरुल उलूम जलालाबाद में दीनी कांफ्रेंस के दूसरे दिन खिताब में यह बात मुफ्ती सलमान मंसूरपुरी ने कही।
मदरसा अख्तरुल उलूम जलालाबाद में दीनी कांफ्रेंस को खिताब करते हुए मुफ्ती सलमान मंसूरपुरी ने दीन और इस्लाम से जुड़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मदरसों ने दीन और इस्लाम को फैलाने में अहम किरदार अदा किया है। यहां से निकलने वाले तलबा दुनिया को दीन और इस्लाम से जोड़ने के मिशन की नसीहत देते हैं। मुफ्ती शरीफ, शब्बीर अहमद, मौलाना शाहनवाज ने अपने खिताब में कुरान और हदीस की हिदायतों पर अमल करने की सलाह दी। कुरान ने दुनिया को नेकी, इंसानियत, प्यार-मुहब्बत का पैगाम दिया है। कुरान हिफ्ज करने वालों को जन्नत में जगह मिलती है।
मौलाना सलीम के संचालन में हुई दीनी कांफ्रेंस के दूसरे दिन कारी अकील ने कुरान की तिलावत की। कारी जुनैद मेरठी ने नात पेश की। मुफ्ती सलमान मंसूरपुरी की अध्यक्षता में आयोजित कांफ्रेंस के आखिर में ठाकुरद्वारा से आए मौलाना शाहनवाज ने मुल्क और दुनिया में अमनो अमान तथा देश की तरक्की की दुआ कराई। कुरान हिफ्ज करने वाले बच्चों की दस्तारबंदी की गई। मदरसे के तलबा ने मकालमा और दीनी तकरीरें पेश कीं। कांफ्रेंस में मुफ्ती असरार, हाजी अय्यूब, इस्फारुल हक जकी, कारी इफ्तखार, मौलाना इमरान, हाजी वकील, मुंशी कामिल, मो.आबिद, मौलाना असलम, मो.वसी, मो.जुबैर, आफताब, यामीन मौजूद रहे।