छाछरीटीप में गोशाला निर्माण के लिए ग्रामीणों से बात करते डीएम।
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बिजनौर में जिले के निराश्रित गोवंशीय पशुओं के भरण पोषण के लिए राज्य सरकार ने एक करोड़ रुपये जिला प्रशासन के खाते में भेज दिए हैं। हर गोवंशीय पशुओं के लिए प्रतिदिन भूसे के लिए 30 रुपये निर्धारित किए गए हैं। धनराशि को नगर पालिकाओं व ब्लॉक कार्यालय के खातों में भेजा जा रहा है। गांव छाछरीटीप में बनने वाली वृहद गोशाला का निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है। डीएम ने गोशाला निर्माण का सत्यापन भी किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुलंदशहर में गोहत्या के बाद हुए बवाल के बाद से एक्शन मोड़ में हैं। जिले में निराश्रित गोवंशीय पशुओं के संरक्षण के लिए जिले की नगर पालिकाओं को पहले ही पैसा मिल चुका था, लेकिन गोशालाओं के निर्माण में बहुत ढील बरती जा रही थी। पिछले महीने मुख्यमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से अधिकारियों के पेंच कसे थे। इसके बाद से गोशाला निर्माण में तेजी आई है। जिले में बनने वाली 12 कान्हा पशु आश्रयस्थल में से आठ का निर्माण पूरा हो चुका है, बाकी का निर्माण भी जल्दी होने के कयास लगाए जा रहे हैं। अब तक 68 पशु जिलेभर की कान्हा गोशाला, 37 कांजी हाउस में व अस्थायी रूप से चल रहीं गोशालाओं में 413 पशु रखे गए हैं। गोवंश के भरण पोषण के लिए जिले को एक करोड़ रुपये प्रदेश सरकार से मिल गया है। एक गोवंशीय पशु के प्रतिदिन के आहार के लिए 30 रुपये निर्धारित किए गए हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा.भूपेंद्र सिंह के अनुसार गोशालाओं में गोवंशीय पशुओं के भरण-पोषण के लिए बजट मिल गया है। जागरूकता से निजी स्तर पर भी गोशालाओं के लिए बजट की व्यवस्था की जाएगी। छाछरीटीप गांव में गोशाला निर्माण शुरू हो गया है।
शेरकोट 2.32
चांदपुर 2.11
किरतपुर 2.32
झालू 2.09
नूरपुर 2.12
जलालाबाद 2.32
मंडावर 2.03
बिजनौर 2.89
नहटौर 3.03
अफजलगढ़ 2.62
नजीबाबाद 3.97
साहनपुर 2.32
कुल 21.48
नोट: आंकड़े पशुधन विभाग से लिए गए हैं। राशि करोड़ में है।
वृहद गोसंरक्षण केंद्र निर्माण शुरू
छाछरीटीप में करीब ढाई हेक्टेयर जमीन में वृहद गोसंरक्षण केंद्र बनाया जा रहा है। निर्माण कार्य शुरू भी हो चुका है। डीएम अटल कुमार राय खुद गोशाला निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे हैं।
हो रही टैगिंग
गोशालाओं में रखी जा रहे पशुओं की टैगिंग की जा रही है। किसान चाहें तो गोवंशीय पशु को गोशाला से ले भी सकता है। इसके लिए कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी और यह भी लिखित में देना होगा कि वह गोवंशीय पशु को बेचेगा नहीं।