बिजनौर। ग्राम पंचायतों में विकास कार्य आधे अधूरे, पंचायतघर तथा सामुदायिक शौचालय का निर्माण निर्धारित समय पर नहीं किया। जबकि निर्माण कार्य 31 अक्टूबर तक पूरे करने थे। साथ ही पंचायत सहायकों के वेतन नहीं देने का आरोप है। सचिवों द्वारा विकास कार्य के क्रियान्वयन व कमिश्नर के आदेशों का पालन न करने के आरोप में प्रशासन ने पंचायत सचिवों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। करीब 350 पंचायत सचिवों का सितंबर माह तथा सभी 1123 पंचायत सचिवों का अक्तूबर माह का वेतन रोक दिया गया है। कार्रवाई से विभाग में खलबली है।
जिले में 1123 पंचायत हैं। 1029 पंचायतों में पंचायत सहायक तैनात हैं, जबकि 94 पंचायतों के पंचायत सहायक द्वारा त्याग पत्र दिए जाने से पद खाली है। कमिश्नर के हर माह की पांच तारीख तक पंचायत सहायकों को वेतन देने के आदेश हैं। पंचायत सहायक को 6000 रुपए मासिक वेतन मिलता है। वेतन ग्राम निधि से दिया जाता है। पंचायत सचिव पंचायत निधि को ऑपरेट करते हैं। विभाग व प्रशासन को पंचायत सचिवों का वेतन नहीं दिए जाने की शिकायत मिल रही थी। इसके अलावा पंचायतों में चल रहे विकास कार्य आधे अधूरे हैं। इसके अलावा पंचायतघर तथा सामुदायिक शौचालय का निर्माण निर्धारित समय पर नहीं किया गया, जबकि इनका निर्माण कार्य 31 अक्तूबर तक होना था। विभाग की जांच में सामने आया कि जिले कि करीब 350 पंचायतों के पंचायत सहायक को सितंबर का वेतन नहीं मिला है। साथ ही सभी 1123 पंचायतों में पंचायत सहायक को अक्तूबर माह का वेतन नहीं मिला है।
परेशान करने का आरोप
पंचायत सहायकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि यदि वह समय से वेतन दिए जाने की मांग करते हैं, तो उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। सचिव मनमानी करते हैं। प्रधान धमकी देते हैं कि पंचायत सहायक को नौकरी में रखने तथा निकालने का अधिकार प्रधान को है। एडीओ भी शिकायत पर चुप्पी साध लेते हैं।
जांच में विकास कार्य आधे अधूरे मिले हैं। पंचायतघर तथा सामुदायिक शौचालय का निर्माण तय तारीख तक पूरे नहीं हुए हैं। सचिवों को निर्माण कार्य 31 अक्तूबर तक पूरा करने को कहा गया था। कमिश्नर के आदेशानुसार पंचायत सहायकों का वेतन भी समय पर नहीं दिया गया। इस पर सचिवों का वेतन रोकने की कार्यवाही की गई है। - सतीश कुमार, डीपीआरओ