बिजनौर के गांव शादीपुर के जंगल में अपने बच्चे के साथ सारस।
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जिले में बढ़ रही है सारस की संख्या
बिजनौर। प्रेम का प्रतीक माने जाने वाले सारस की संख्या जिले में बढ़ गई है। पिछले साल जिले में 104 सारस मिले थे। इस बार इनकी संख्या बढ़कर 116 हो गई है। सर्वे के दौरान काफी संख्या में सारस के बच्चे भी मिले हैं।
सारस उत्तर प्रदेश का राज्य पक्षी है। सासर को प्रेम का प्रतीक कहा जाता है। माना जाता है कि पहले काव्य की रचना सारस पर ही गई थी। एक ऋषि सुबह नदी किनारे गए थे। वहां पर सारस का एक जोड़ा प्रणय में लीन था। एक शिकारी ने तीर से एक सारस को मार दिया था। तब दूसरे सारस ने अपने साथी के वियोग में सिर को जमीन पर पटकते हुए अपनी जान दे दी थी। तब उन ऋषि के मुंह से निकले शब्द संसार का पहला काव्य माने गए थे। तभी से सारस प्रेम का दूसरा रूप कहा जाता है। महर्षि कालिदास ने अभिज्ञान शाकुंतलम में सारस के प्रेम का उल्लेख किया है। आज भी सारस जोड़े में ही मिलते हैं। यह दलदली क्षेत्रों में मिलते हैं और वहीं पर जमीन पर ही अपने घोंसले बनाते हैं। वन विभाग द्वारा हर साल सासर की गणना की जाती है। पिछले साल वन विभाग को गणना में 104 सारस मिले थे। इस साल सारस की संख्या बढ़कर 116 तक पहुंच गई है। सारस की संख्या बढ़ने से वन विभाग के अफसर भी गदगद हैं। वहीं, डीएफओ एम सेम्मारन का कहना है कि सारस की संख्या जिले में लगातार बढ़ रही है। जिले में सारस के लिए अच्छा पर्यावरण व परिस्थिति हैं।
रेंज व्यस्क बच्चे योग
नगीना 14 01 15
नजीबाबाद 20 01 21
चांदपुर 09 01 10
अमानगढ़ 10 05 15
बिजनौर 07 04 11
कुल 89 27 116
नोट : आंकड़े वन विभाग से लिए गए हैं।