बिजनौर में शासन ने भले ही कर्मचारियों व शिक्षकों को नई पेंशन योजना से जोड़ने का बीड़ा उठाया हो पर जिले के आठ हजार शिक्षकों अभी तक पेंशन योजना से नहीं जोड़ा गया है। नियुक्ति के 11 वर्ष बाद भी शिक्षकों को पुरानी व नई पेंशन योजना से जुड़ने का इंतजार है।
शासन ने एक अप्रैल 2005 के बाद नियुक्ति पाए शिक्षकों को पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त कर दी थी। शासन ने नई पेंशन योजना शुरू की थी। पर 11 वर्ष बाद भी शिक्षकों को अभी तक नई पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल पाया है।
नई पेंशन योजना से जोड़ने के लिए शिक्षकों से दो बार फॉर्म भरवाए गए। इसके बाद योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। वर्ष 2016 में करीब आठ हजार शिक्षकों ने नई पेंशन योजना से जुड़ने के लिए आवेदन किया था। पर अभी तक योजना से नहीं जोड़ा गया। हालांकि उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ, उप्र जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ, ऑल टीचर्स एंप्लाइज एसोसिएशन सहित कई संगठन पुरानी पेंशन योजना का बहाल कराने की मांग करते रहे हैं। लेकिन, किसी स्तर पर भी शिक्षकों की सुनवाई नहीं हुई है। दो महीने पहले लखनऊ में पेंशन को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान एक शिक्षक की लाठीचार्ज के दौरान मौत भी हो गई थी। शिक्षकों का कहना है कि केंद्र व प्रदेश सरकार ने पेंशन के मामले में शिक्षकों को उलझा कर रखा है। प्राथमिक शिक्षक संघ के वरिष्ठ नेता असीम चौहान, कुड़वा सिंह, धर्मेंद्र सिंह व देवेंद्र शर्मा का कहना है कि शासन की कथनी करनी में बड़ा अंतर है। शिक्षकों के हितों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पुरानी पेंशन व्यवस्था में ही शिक्षकों व कर्मचारियों के हित सुरक्षित हैं। दूसरी ओर, वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा संजय शर्मा ने बताया कि शासन स्तर पर पेंशन व्यवस्था का मामला चल रहा है। शासन स्तर से निर्देश मिलने पर नई पेंशन योजना से शिक्षकों को जोड़ने की कार्रवाई की जाएगी।