विश्व स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित कार्यशाला में मौजूद डॉक्टर और अन्य।
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बिजनौर का वाह! रे, स्वास्थ्य विभाग। विश्व स्वास्थ्य दिवस न कोई गोष्ठी, न ही कोई कार्यक्रम। खास बात यह है कि स्वयं सीएमओ भी विश्व स्वास्थ्य दिवस याद नहीं रहा। जबकि शासन के आदेशानुसार जिला मुख्यालय व सभी सरकारी अस्पतालों में कार्यक्रम आयोजित करने थे तथा कार्यक्रम में बच्चों को शामिल कर उन्हें मधुमेह व अन्य बीमारियों से बचाव की जानकारी देनी थी।
प्रत्येक वर्ष सात अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। शासन ने इस वर्ष स्वास्थ्य दिवस की थीम मधुमेह यानि डायबिटीज के लक्षण व बचाव के उपाय रखी थी। स्वास्थ्य विभाग को जिला मुख्यालय, सभी सीएचसी व पीएचसी पर गोष्ठी व अन्य अन्य कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए थे।
इन सभी के बावजूद जिला मुख्यालय पर कोई कार्यक्रम नहीं हुआ। सीएमओ सुबह के समय फील्ड में निरीक्षण के लिए निकल गए और दुपहर में आफिस में आकर बैठ गए। लेेकिन बच्चों को बुलाकर बीमारी से बचाव की जानकारी देना, तो दूर की बात विभाग ने एक गोष्ठी तक आयोजित नहीं। जिला अस्पताल में सीएमएस ने तो एक स्कूल के बच्चों को बुलाकर कार्यक्रम आयोजित करा दिया। इनके अलावा कही भी कार्यक्रम नहीं हुआ।
सीएमओ डा. मनमोहन अग्रवाल का कहना है कि शासन ने विश्व स्वास्थ्य दिवस को मधुमेह से बचाव के रूप मेें मनाने के निर्देश मिले थे। इस संबंध में सभी सीएचसी पीएचसी को चार अप्रैल को सूचित कर दिया गया था। वह सुबह के समय फिल्ड में निरीक्षण के लिए चले थे। इस कारण कार्यक्रम आयोजित नहीं हो सका।