काटे गए थे लगभग ढाई लाख पेड़
तीनों हाईवे बनाने के लिए पिछले तीन सालों के भीतर ही करीब ढाई लाख पेड़ काट दिए गए। हरिद्वार-काशीपुर हाईवे के किनारे खड़े हजारों पेड़ों पर सड़क के विकास के लिए ही आरी चली थी। वहीं मेरठ-पौड़ी हाईवे को फोरलेन बनाने के लिए बिजनौर से नजीबाबाद तक सभी पेड़ काट दिए गए। उधर, पेड़ों की अधिकता की वजह से जिले की सबसे ठंडी कहलाए जानी वाली बिजनौर कोतवाली रोड भी आज पेड़ विहीन हो चुकी है। अभी बिजनौर से बैराज तक ही 15 हजार पेड़ काटे जाने हैं। काटे गए पेड़ों की पूर्ति करने के लिए ही बड़े स्तर पर पौधरोपण की तैयारी चल रही है।
पौध तैयार करने का खर्च बचेगा
डीएफओ डॉ. अनिल पटेल ने बताया कि पौध बड़े स्तर पर तैयार नहीं हो पाती। ऐसे में भी वन विभाग ने यह राजस्थान मॉडल अपनाने पर भी विचार किया है, जिसमें सड़क किनारे बरसात के मौसम में बीज रोपित कर दिए जाएंगे। बीज से अंकुर फुटने पर पौध तैयार होगी और उसी जगह यह पौध पेड़ बन जाएगा। इसमें पौध तैयार करने का खर्च भी बचेगा। बता दें कि यह राजस्थान में ऐसा ही हुआ है।
जो सड़क चौड़ी हुई हैं, उनके किनारों पर यह प्रयोग किया जाएगा। दोनों ओर खाली पड़ी जमीन पर नीम के बीज और पौधे लगवाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए एनएच अथॉरिटी अफसरों से वार्ता कर पूरी योजना तैयार कर ली जाएगी। - डॉ. अनिल पटेल, डीएफओ बिजनौर