नजीबाबाद - मेघना अग्रवाल को विद्या वाचस्पति उपाधि से सम्मानित करते दिल्ली विश्व विद्यालय के वाइ
नवाब नजीबुद्दौला के द्वारा बसाया गया नजीबाबाद ऐतिहासिक नवाबी इमारतों और कलात्मक कारीगरी के लिए प्रसिद्ध है। दिल्ली विश्वविद्याल ने नवाब नजीबुद्दौला के समय में आर्ट ऑफ कल्चर विषय पर बिजनौर में जन्मी मेघना अग्रवाल को विद्या वाचस्पति उपाधि से अलंकृत किया है।
नवाब नजीबुद्दौला ने वर्ष 1751 में नजीबाबाद को बसाया था। उनके जमाने में नगर को ऐतिहासिक और कलात्मक नवाबी इमारतें मिलीं। नवाब नजीबुद्दौला का मकबरा, पत्थरगढ़ का किला सहित धरोहर के रूप में कई कलात्मक नवाबी इमारतें आज भी सुरक्षित हैं, जबकि अनेक इमारतें इतिहास बन चुकी हैं।
नवाब नजीबुद्दौला के मकबरे के निकट चंद्रा हाउस में जन्मी समाजसेवी एवं कारोबारी साहू अवधेश अग्रवाल की पुत्री मेघना अग्रवाल को बचपन से ही नगर की कलात्मक इमारतों और यहां की गंगा जमुनी संस्कृति से अनुराग रहा। नगर को बसे हुए करीब पौने तीन सौ साल बीत चुके हैं। लंबे अरसे के बाद मेघना अग्रवाल ने नगर को अपने शोध से पहचान दिलाई।
दिल्ली विश्वविद्यालय के संगीत और ललित कला विभाग से मेघना अग्रवाल ने आर्ट एंड कल्चर इन दा टाइम ऑफ नजीबुद्दौला विषय से शोध कार्य किया। यह पहला अवसर है जब नवाबों की कलानुराग और कलात्मक कारीगरी को लेकर शोध किया गया है। दिल्ली विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में रविवार को नगर की बेटी मेघना अग्रवाल को उनके शोध के लिए राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू की उपस्थिति में विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर योगेश सिंह ने विद्या वाचस्पति की उपाधि प्रदान की। मेघना कहती हैं कि जिस भूमि पर इंसान जन्म लेता है, उसकी माटी पर खेलता और बड़ा होता है उससे अनुराग होना स्वाभाविक है।
नवाब के कलात्मक अनुराग और परिजनों से मिली प्रेरणा
मेघना अग्रवाल कहती हैं कि नवाब नजीबुद्दौला की सकारात्मक सोच, उनकी कलात्मक नवाबी इमारतों, यहां की गंगा-जमुनी रिवायत से उन्हें आर्ट और कल्चर विषय पर शोध की प्रेरणा मिली। मेघना ने उपलब्धि का श्रेय अपने पिता अवधेश अग्रवाल, पति शुभायन जैन और शोध में सहायकों को दिया।