बिजनौर में नजीबाबाद शुगर मिल में गन्ने की बगास अर्थात खोई से एथेनाल बनेगा। इस सुविधा वाली यह प्रदेश की पहली चीनी मिल होगी। मिल ने उत्पादन संयंत्रों की स्थापना के लिए काम शुरू कर दिया है।
डीसीओ ओपी सिंह के अनुसार, एथेनाल को पेट्रोल व डीजल में एक निश्चित मात्रा में मिलाया जाता है। जिले की धामपुर समेत कई शुगर मिल एथेनाल का उत्पादन कर रही हैं। अभ तक मिल शीरे से एथेनाल तैयार कर रही थीँ। गन्ने में चार प्रतिशत शीरा निकलता है। ये मिलें तीन लाख लीटर प्रतिदिन एथेनाल बनाती हैं। खोई 31 प्रतिशत निकलती है। इसमें 25 प्रतिशत खोई जलाने में खर्च हो जाती है। बाकी खोई गत्ता उत्पादन में काम आती है।
वैज्ञानिकों ने अब खोई से एथेनाल उत्पादन का तरीका खोजा है। इस प्रक्रिया में सेलोबाइटिक बैक्टीरिया का कल्चर तैयार किया जाएगा। इसके बाद खोई को डिकंपोज करके बैक्टीरिया का समावेश अर्थात इंट्रोड्यूस किया जाएगा। इस प्रक्रिया को अपनाने वाली नजीबाबाद चीनी मिल प्रदेश में पहली होगी। शुगर मिल के जीएम आरबी यादव के अनुसार इस पर काम शुरू हो गया है। प्रदेश में 118 शुगर मिल हैं।