कोरोना संक्रमण में निखरा नहटौर का कपड़ा उद्योग
बिजनौर। 25 पैसे छूट कपड़े के किसी पीस के लिए कितनी ज्यादा रहती है। नहटौर का कपड़ा व्यापार केवल 25 पैैसे की छूट की वजह से अपने ही देश में तरक्की नहीं कर पा रहा था। नहटौर के कपड़ा व्यापार को चाइना का बाजार केवल 25 पैसे के अंतर की वजह से पछाड़ रहा था, लेकिन कोरोना की वजह से नहटौर के कपड़ा व्यापार पर चमक आई है। कपड़ा उद्योग में करीब 20 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
नहटौर में कपड़े का काम बड़े स्तर पर होता है। खासतौर से यहां पर बने स्कार्फ व स्टॉल विश्व भर में प्रसिद्ध है। यहां जैसी कारीगरी कहीं और देखने को नहीं मिलती है, लेकिन फिर भी देशभर में कपड़े के काम को ज्यादा काम नहीं मिल रहा था। वजह थी चीन से आने वाला सस्ता कपड़ा। सस्ता तो कितना, 25 पैसे प्रति पीस। केवल 25 पैसे के अंतर की वजह से देश के व्यापारी भी नहटौर का कपड़ा नहीं खरीदते थे और चीन का कपड़ा बाजी मार ले जाता था, लेकिन कोरोना काल में प्रधानमंत्री की अपील के अनुसार कुछ लोगों ने स्वदेशी सामान को खरीदना पसंद किया तो चीन से कोरोना की वजह से कपड़ा आ भी नहीं सका। इस सब का फायदा नहटौर के कपड़ा कारोबार को हुआ है। पहले के मुकाबले कपड़ा कारोबार करीब 20 प्रतिशत बढ़ गया है। इस उद्योग से जुड़े उद्यमी भी खुश हैं। वे चाहते हैं कि जनता देश में बना कपड़ा ही खरीदे।
200 करोड़ का हुआ टर्नओवर
जिले में कपड़े से जुड़ीं करीब 40 यूनिट हैं। लगभग सभी नहटौर में हैं। इसका टर्नओवर 200 करोड़ तक हो गया है जो पहले कम रहता था। देशभर के अलावा नहटौर का कपड़ा यूरोपीय देशों जर्मनी, इटली, फ्रांस, स्पेन, डेनमार्क में भी जाता है। नहटौर का कपड़ा गुणवत्ता में तमिलनाडु के कपड़े को टक्कर दे रहा है। अभी प्लेन कपड़ा ही नहटौर में बनता है। चाइना से ज्यादा माल न आने की वजह से विदेशों में भी पहले से ज्यादा माल जा रहा है।
बढ़ा है कारोबार
कपड़ा उद्योग से जुड़े नदीम मकसूद के अनुसार लोगों के स्वदेशी माल अपनाने की वजह से पहले से कारोबार बढ़ा है। पहले 25-30 पैसे के अंतर की वजह से ही व्यापारी हमारा माल नहीं खरीदते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। वर्तमान परिस्थिति उद्योग के लिए अच्छी है।