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अनुसूचित जाति, जनजाति के बच्चों के प्रति उपेक्षा को सदन में उठाया

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सांसद गिरीशचंद । - फोटो : DHAMPUR
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धामपुर। नगीना लोकसभा क्षेत्र के बसपा सांसद गिरीशचंद ने मंगलवार को दिल्ली में चल रहे संसद के शीतकालीन सत्र में प्रदेश में अनुसूचित जाति-जनजाति के छात्र-छात्राओं के साथ उच्च शिक्षा में उपेक्षापूर्ण निर्णय के मुद्दे के रूप में दमदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा रहा कि संबंधित जातियों के बच्चे उच्च शिक्षा से वंचित रह जाएंगे। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से केवल इंटर तक के उन्हीं बच्चों को छात्रवृति और प्रतिपूर्ति दी जा रही है जो 60 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण है। बाकी किसी को नहीं दी जा रही है। ऐसा किया जाना सरकार की इन जातियों के बच्चों के प्रति एक नकारात्मक कदम है।
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सांसद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सीएम द्वारा अनुसूचित जाति ओर जन जाति के छात्र-छात्राओं को इंटरमीडिएट के बाद उच्चतर कक्षाओं में पठन पाठन से रोकने के लिए उच्च शिक्षा में छात्रवृत्ति और प्रतिपूर्ति को बंद कर दिया है। जबकि यह छात्रवृत्ति और प्रतिपूर्ति पूर्व की सरकारों की ओर से अब तक मिलती रही है। इसमें अंकों की वाध्यता कभी नहीं रही। पर यूपी की वर्तमान सरकार ने इसे इंटरमीडिएट के बाद रोक दिया है। इंटर में भी केवल 60 प्रतिशत अंक पाने वाले छात्र-छात्राओं को ही छात्रवृत्ति और प्रतिपूर्ति दी जा रही है। जिससे इन जातियों के गरीब और मजलूम परिवारों के बच्चे उच्च शिक्षा की पढ़ाई करने से वंचित हो रहे है। सदन से मांग की कि प्रदेश सरकार की ओर से गए इस फैसले पर विचार करें, जिससे प्रदेश के अनुसूचित जाति और जन जाति के बच्चे उच्च शिक्षा पाकर राष्ट्र की मुख्य धारा से जुड़ सकें।
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