गंगा कटान रोकने को नाबार्ड से मांगा 61 करोड़ का बजट
बिजनौर। गंगा खादर को कटान से निजात दिलाने के लिए 61 करोड़ रुपये का बजट नाबार्ड से मांगा गया है। खादर में गंगा से होने वाले कटान को रोकने के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार ने पिछले साल ही मंजूर कर लिया था। अब इस प्रस्ताव के अनुसार बजट जारी होना है। केंद्र और नाबार्ड दोनों ही इस योजना के लिए बजट जारी कर सकती है। सिंचाई विभाग ने फिलहाल नाबार्ड से उक्त योजना के लिए बजट मांगा है। बजट मिलने के बाद ही कटान निरोधी कार्य शुरू किया जाएगा। उधर, बरसात आने को है, ऐसे में बजट जल्द मिलता भी है तो यह काम पूरे करना चुनौती साबित होगा।
उत्तराखंड में होने वाली बारिश का पानी गंगा व बाकी बरसाती नदियों के जरिये गंगा में आता है। यह पानी बरसात में भारी तबाही मचाता है। उफान खाती गंगा की लहरें खादर में खेतों की ओर जबरदस्त तरीके से कटान करती है। गंगा की लहरों की वजह से किसानों की हजारों बीघा जमीन कटकर गंगा के बहाव में समा चुकी है। उत्तराखंड की ओर कई साल पहले तटबंध होने की वजह से पानी का पूरा जोर जिले की ओर ही रहता है। जिले के किसान कई साल से तटबंध और गंगा पर पैंटून पुल बनवाने की मांग कर रहे थे। पिछले साल गांव डैबलगढ़ के सामने पैंटून पुल बनाया जा चुका है। साथ ही केंद्र सरकार के कटान निरोधी करीब 61 करोड़ के प्रस्ताव को भी केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी थी। केंद्र ने मंजूरी तो दे दी लेकिन अभी इसके लिए बजट जारी नहीं हुआ है। कटान निरोधी कार्य के लिए या तो केंद्र सरकार सीधे ही बजट जारी कर सकती है या नाबार्ड से पैसा दिला सकती है। फिलहाल नाबार्ड से ही पैसा लेने की कोशिश की जा रही है। पैसे के लिए प्रस्ताव को नाबार्ड के पास भेजा गया है।
ये गांव हैं गंगा किनारे
मंडावर में गंगा तट पर कुंदनपुरी, टीप, फतेहपुर, सीमली, मिर्जापुर, कोहरपुर, राजारामपुर, रघुनाथपुर, डैबलगढ़, चाहड़वाला, वीरूवाला, रावली, ब्रह्मपुरी, सुक्खापुर, सैफपुर, सिकोहाबाद, सीमली खुर्द, स्योहारा, मानवाला, मीरापुर, औरंगाबाद, शकूरपुर, बादशाहपुर, मानशाहपुर, भोगपुर, शहजादपुर और इच्छावाला गांव बसे हैं। कटान निरोधी कार्य होने से इन सभी गांवों के किसानों को फायदा होगा।
पैसे मिलने पर काम होगा शुरू
सिंचाई विभाग के एक्सईएन रामबाबू के अनुसार प्रस्ताव को पैसे के लिए नाबार्ड को भेजा गया है। बजट आवंटित होने के बाद ही कटान निरोधी कार्य शुरू किया जाएगा।