- एक साल पहले अल फैजान म्यूचुअल बेनिफिट निधि लिमिटेड ने करोड़ों रुपये ठग लिए थे
- आज तक अपनी रकम वापसी की उम्मीद लगाए हुए हैं लोग
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गौरव गोयल
नगीना। अल फैजान म्यूचुअल बेनिफिट निधि लिमिटेड शाखा को बंद कर खातेदारों के करोड़ों रुपये की नकदी व सोने-चांदी के जेवरात लेकर फरार होने के मामले में आरोपियों को जेल दिया गया। लेकिन एक साल बाद भी हजारों लोगों के खाते में आज तक फूटी कौड़ी भी वापस नहीं लौटी।
नगीना के मोहल्ला लाल सराय में स्थित अल फैजान म्यूचुअल बेनिफिट निधि लिमिटेड के नाम से एक शाखा में बैंकिंग कार्य होता था। संचालक एजेंटों के माध्यम से दुकानदारों से रकम का कलेक्शन कर शाखा में जमा कराते थे। पिछले साल जनवरी के माह में इस शाखा को बंद कर दिया गया, जिससे लोगों की करोड़ों की रकम एक पल में डूब गई थी। अल फैजान शाखा के मुख्य संचालक मोहम्मद फैजी के करीब 3 महीने तक दुबई में रहने के बाद जब पुलिस ने उसे जयपुर एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया तो नगीना थाने में हुई प्रेस वार्ता में उसने अपना भी कई लोगों पर करोड़ों रुपये बकाया होने की बात कही थी। तब उसके बयान के बाद तमाम खातेदारों को अपना पैसा वापस होने की कुछ उम्मीद जगी थी, लेकिन इस मामले में भी कुछ नहीं हुआ।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष अब्दुल कय्यूम राईन का कहना है कि शासन को अल फैजान शाखा के बंद होने से आम लोगों व छोटे दुकानदारों के जो करोड़ों डूबे हैं, उसको भी वापस लाने के लिए प्रयास करना चाहिए। पीसीएल कंपनी के मामले में प्रशासन जिस तरह लोगो की मदद करता दिख रहा है। ऐसे ही मदद इस मामले में भी होनी चाहिए।
राहुल राज का कहना है कि अल फैजान शाखा में उनके करीब 72 हजार रुपये जमा थे। फलों का काम वाले राहुल का कहना है कि यह रकम बड़े फल विक्रेताओं को देने के लिए इकट्ठा की थी इस रकम के डूबने से वह उनका कर्जदार बन गया है।
संजय सैनी का कहना है कि अल फैजान शाखा के बंद होने से उसके घर बनने का सपना अधूरा रह गया। उसने बताया कि ठेला लगाकर उसने बड़ी मुश्किल से अपनी एक लाख 20 हजार रुपये की रकम जमा की थी जो कि डूब गई। उसका कहना है कि उसे उम्मीद है कि सरकार इस दिशा में उनकी जरूर मदद करेगी।
विनोद कुमार का कहना है कि उसकी बड़ी मेहनत की कमाई हुई 53 हजार रुपये की रकम डूबी पड़ी है। उसका कहना है कि रिक्शा चलाकर व परिवार का पालन पोषण करता है लेकिन अब वह कर्जदार बन गया है। उसका कहना है कि शाखा के मुख्य संचालक द्वारा जिन लोगों पर अपना रुपया बताया गया है उनसे रुपए दिलवाकर प्रशासन को खातेदारों को दिलवाने चाहिए।