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बीसीए करने का ख्वाब लेकर अलीगढ़ गया मुनीर अपराध में कर आया पीएचडी

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बीसीए करने गया मुनीर, अलीगढ़ करके आया था अपराध में ‘पीएचडी’
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अचल चौधरी
बिजनौर। देशभर में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का नाम है, यहीं से बीसीए करने के लिए मुनीर अलीगढ़ गया। डिग्री तो ले नहीं पाया लेकिन अपराध का ककहरा जरूर सीख गया। सिर्फ ककहरा ही नहीं बल्कि अपराध में पीएचडी भी कर ली। गर्लफ्रेंड और खुद के शौक पूरे करने के लिए मुनीर ने लूट और हत्या की वारदातों को अंजाम देना भी अलीगढ़ में शुरू किया।
बिजनौर के कस्बा सहसपुर में रहने वाला मुनीर साल 2009 में अपने फुफेरे भाई जफर के पास अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने के लिए तैयारी करने गया था। अलीगढ़ में मुनीर जफर के साथ रहने लगा। बताया जाता है कि वह एएमयू से बीसीए करने लगा था, जिसे पूरा नहीं कर पाया। हालांकि एएमयू के प्रशासन ने कभी उसका प्रवेश होने की बात पर मुहर नहीं लगाई। इसके बाद भी अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में उसका खूब आना जाना रहा। अलीगढ़ में ही उसकी दोस्ती फैजाबाद के आशुतोष मिश्रा, आजमगढ़ के शादाब, एनसीआर के अतीउल और अंबेडकरनगर निवासी सऊद से हो गई। अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में चुनाव के दौरान कई झगड़े हुए। अलीगढ़ से ही मुनीर अपने साथी आशुतोष और सऊद के साथ अपराध की दुनिया में उतरा। जिसने लूटपाट करनी शुरू कर दी। संवाद
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छात्रसंघ के चुनाव में दिया था करीबी साथ
2013 में एएमयू में छात्रसंघ के चुनाव हुए। इस चुनाव मेंमुनीर ने एक करीबी छात्र का साथ दिया। जहां छात्र गुटों के झगड़े में उसका नाम आने लगा। साल 2013 में मुनीर के खिलाफ अलीगढ़ में जमीन कब्जे के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था।
साल 2014 में की पीतल कारोबारी की हत्या
साल 2014 को अलीगढ़ अमीरनिशां बाजार में पीतल कारोबारी फहद की मुनीर और आशुतोष ने हत्या कर दी थी। वहीं 16 सितंबर 2015 को एएमयू में छात्र आलमगीर को दिनदहाड़े हत्या हुई थी। हत्या की रिपोर्ट मुनीर, रेहान व सादाब निवासी आजमगढ़ व आशुतोष मिश्रा निवासी फैजाबाद के खिलाफ दर्ज कराई थी। इस केस में मुनीर नहीं पकड़ा जा सका था।
अलीगढ़ से भाग दिल्ली को बनाया ठिकाना
हत्या और लूट के बाद जब पुलिस पीछे लगी तो मुनीर अलीगढ़ छोड़कर बटाला हाऊस दिल्ली में किराए पर रहने लगा। बटाला हाऊस से साढ़े तीन किलोमीटर की दूरी पर शाहीन बाग में सपरिवार रहने वाले तंजील अहमद के संपर्क में मुनीर आ गया। सहसपुर के मूल निवासी तंजील अहमद एनआईए में डीएसपी थे। एक ही कस्बे का होने का कारण नजदीकियां बढ़ती चली गई। मुनीर ने तंजील अहमद से फ्लैट और हथियार दिलाने को कहा। 29 नवंबर 2014 में कमला नगर दिल्ली में आशुतोष के साथ मिलकर मुनीर ने कैैश वैन के गार्ड की गोली मारकर हत्या की और डेढ़ करोड़ रुपये लूटे। बटाला हाऊस से अलीगढ़ पुलिस आशुतोष को पकड़कर ले आई थी। इसके बाद उसने सरुद के साथ मिलकर धामपुर में पीएनबी कैश वैन के गार्ड को गोली मारकर 95 लाख रुपये की लूट की।
मुखबिरी के शक में एनआईए के डीएसपी को मारा
सहसपुर के रिजवान से मुनीर को जानकारी मिली कि पुलिस उसे तलाश कर रही है। यह भी बताया गया कि मुखबिरी तंजील कर रहा है। इसके बाद तंजील अहमद को रास्ते हटाने का प्लान बनाया। आखिरकार मुनीर ने रैय्यान के साथ मिलकर डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी को मार डाला था।
सीसीटीवी फुटेज डिलीट कराने से पुलिस को मिला सुराग
बिजनौर। राष्ट्रीय जांच एजेंसी के डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या करने के तुरंत बाद मुनीर रैय्यान को सहसपुर में छोड़कर फरार हो गया था। मुनीर के फरार होने के बाद रैय्यान को पकड़े जाने का डर लगा तो वह एक मोबाइल रिचार्ज करने की दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज डिलीट कराने के लिए पहुंच गया था। बस यहीं से पुलिस के हाथ सुराग लगा और रैय्यान को धर दबोचा गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार मुनीर ने रैय्यान से पूछा था कि क्या तंजील आया है। रैय्यान ने तंजील के आने की जानकारी दे दी। इसके बाद ही मुनीर ने रैय्यान को संग लेकर दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया। मुनीर हत्याकांड को अंजाम देने के लिए चार पिस्टल लेकर आया था, जिसमें दो रैय्यान को देकर बाइक पर बैठाया। रैय्यान को पहनने के लिए अपनी शर्ट भी मुनीर ने ही दी थी। इस दौरान रास्ते में एक मोबाइल रिचार्ज करने की दुकान में सीसीटीवी कैमरे लगे थे, रैय्यान को लगा कि वह उसमें कैद हो गए हैं। उसने दुकानदार पर फुटेज डिलीट करने का दबाव बनाया। इसी से पुलिस को सुरगा लगा और उसे पकड़कर पूछताछ की तो पूरी घटना का खुलासा हो गया।
तंजील और उनकी पत्नी पर की थी ताबड़तोड़ फायरिंग
बिजनौर। कार से एक शादी समारोह में शामिल होकर लौट रहे एनआईए के डीएसपी और उनकी पत्नी पर मुनीर और रैय्यान ने तबाड़तोड़ फायरिंग की थी। करीब 24 गोलियां तो तंजील को ही लगी थीं, गोली लगने और शरीर से बाहर निकलने के करीब 33 निशान थे।
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मूलरुप से सहसपुर के रहने वाले एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद अपनी पत्नी फरजाना खातून और बच्चों के संग वैगनआर गाड़ी से स्योहारा आए थे। 2 अप्रैल 2016 की रात को बंधन मैरिज हॉल में भांजी की शादी की रस्मों में उन्होंने भाग लिया। रात में लगभग साढ़े बारह बजे तंजील अपनी पत्नी और दोनों बच्चों के साथ अपने घर सहसपुर के लिए चल दिए। गाड़ी को तंजील अहमद चला रहे थे, पत्नी बराबर वाली सीट पर और बच्चे पिछली सीट पर बैठे थे। उनकी गाड़ी के पीछे उनके भाई रागिब मसूद अपने बच्चों के साथ दूसरी गाड़ी से पीछे पीछे आ रहे थे। जब तंजील अहमद सहसपुर में ताल कटोरा तालाब के पास निर्माणाधीन पुलिया पर पहुंचे तभी बाइक पर आए दो बदमाशों ने तंजील अहमद और उनकी पत्नी पर गोलियां चला दीं। गोली लगने से तंजील अहमद व उनकी पत्नी फरजाना गंभीर रुप से घायल हो गईं। घायलों को कॉसमॉस अस्प्ताल मुरादाबाद ले जाया गया। जहां तंजील अहमद को मृत घोषित कर दिया गया। फरजाना को फोर्टिस अस्पताल नोएडा के लिए रेफर किया गया। फरजाना को फोर्टिस अस्पताल से एम्स दिल्ली ले जाया गया। जहां फरजाना की 13 अप्रैल को मौत हो गई। मामले में पुलिस ने मुनीर, रैय्यान के साथ तंजीन, जैनी और रिजवान के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। तंजीन, जैनी और रिजवान पर इस दोहरे हत्याकांड के षडयंत्र में शामिल होने और मुनीर तथा रैय्यान की मदद करने का आरोप था। हालांकि कोर्ट तंजीन, जैनी और रिजवान को बरी कर चुकी है।
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