-सूखरो नदी के पुल का पहुंच मार्ग कटने से नगीना-कोटद्वार मार्ग हुआ बंद
-खो नदी के पुल का पहुंच मार्ग कटने से सादात-बढ़ापुर मार्ग पर भी आवागमन हुआ बंद
-हरिद्वार-काशीपुर नेशनल हाइवे पर धामपुर शेरकोट के बीच सीधी टक्कर दे रहा खो नदी का पानी
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। पहाड़ों पर हो रही बारिश से जिले की नदियों में भयंकर उफान आया हुआ है। खो नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि गंगा का जलस्तर भी खतरे के निशान को छू रहा है। तेज बहाव में सूखरों नदी पुल की अप्रोच कट जाने से नगीना कोटद्वार मार्ग बंद हो गया है। वहीं रायपुर सादात और बढ़ापुर मार्ग को भी खो नदी पुल की अप्रोच रोड कट जाने की वजह से बंद करना पड़ा। कोटावाली नदी का रपटा टूटने के कारण हाइवे के ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया है।
मंगलवार की देर शाम से सूखरो नदी में पानी बढ़ना चालू हुआ। जहां पानी के उफान और तेज बहाव की वजह से सूखरो नदी के पुल की अप्रोच रोड पूरी तरह से कट गई और पुल सड़क से अलग हो गया। सड़क कट जाने की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन ने आनन फानन में नगीना से कोटद्वार की तरफ जाने वाले यातायात को रोक दिया। बताया जा रहा है कि उधर से जा रहा एक बाइक सवार सीधे नदी में जा गिरा था, जिसे लोगों ने बचा लिया। रायपुर सादात और बढ़ापुर मार्ग में खो नदी के पुल की अप्रोच रोड भी कट गई है। जिसके चलते इस मार्ग को भी बंद कर दिया गया। एडीएम वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार, एसडीएम नगीना ने सूखरो और खो नदी के पुल का मौका मुआयना भी किया।
उधर गंगा में भी उफान बना हुआ है। बुधवार को बिजनौर बैराज पर गंगा का जलस्तर 219.80 मीटर दर्ज किया गया, जोकि खतरे के निशान से महज 0.20 मीटर ही दूर है। बैराज से गंगा में एक लाख 54 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। खो नदी की बात करें तो शेरकोट में खो बैराज पर नदी का जलस्तर 226.65 मीटर बना हुआ है। जोकि खतरे के निशान से ऊपर है। बता दें कि खो बैराज पर खतरे का निशान 225.25 मीटर है।
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मालन नदी में भी जबरदस्त उफान
बेगावाला। मालन नदी का जलस्तर कई दिनों से बढ़ा हुआ है। नदी का पानी ब्रह्मपुरी और रावली के बीच बने रपटे पर पानी दो फीट से ऊपर चल रहा है। जिस कारण से ग्रामीणों और राहगीरों का निकलना मुश्किल हो गया है। नदी में नाव चला कर आवागमन किया जा रहा है। उधर ग्रामीणों के लिए चारे की व्यवस्था करना बहुत मुश्किल हो गया है। ग्रामीण सुनील, वेदराम, नरेश आदि का कहना है कि सभी जनप्रतिनिधियों से पुल की समस्या को रखा गया, लेकिन आज तक इस नदी पर पुल नहीं बन सका।