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सगी मां से ठुकराए बच्चों को मिली ममता की छांव

Mon, 13 May 2019 11:14 PM IST
Deepak Sharma अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
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नए परिजनों को बच्चों को सौंपते जिला बाल कल्याण समिति सदस्य। - फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में चार दिन पहले चांदपुर में बास्टा क्षेत्र में लावारिस हालत में घूमते मिले बच्चों को उसकी सगी मां ने तो ठुकरा दिया, लेकिन नई मां ने अपने ममता के आंचल की छांव दी है। दोनों बच्चों को उनकी नई मां व जैविक पिता को सौंप दिया गया। बच्चों को पाकर दोनों की आंखें भर आई। जिला बाल कल्याण समिति ने दोनों बच्चों को उनके परिवार को सौंप दिया।
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चार मई को चांदपुर के बास्टा क्षेत्र में दो बच्चे लावारिस हालत में घूमते मिले थे। उन्होंने अपना नाम राज (9) व दीपिका(6) बताए। बास्टा के ग्राम प्रधान सिराजुद्दीन ने दोनों को अपने पास रखा व बाल कल्याण समिति को सूचना दी। बच्चों ने बताया कि उनका पिता उन्हें दिल्ली से यहां छोड़ गए हैं। बाल कल्याण समिति ने बच्चों के बताए पते के आधार पर उनकी मां पूनम चौहान से संपर्क किया। पूनम ने बिजनौर आकर समिति सदस्यों को बताया कि 2010 में उसकी शादी मध्य प्रदेश निवासी सुनील चौहान के साथ हुई थी। साल 2011 में वह अपने मायके में आकर रहने लगी। उसका पति उससे घर जाने के लिए कहता था, लेकिन वह मना कर देती थी। इस दौरान उसके दो बच्चे हुए। 2015 में वह हुकुम सिंह के साथ अकेली दिल्ली चली गई और उससे शादी करके वहीं रहने लगी। कुछ समय बाद उसने अपनी मां व दोनों बच्चों को भी वहीं बुला लिया। दिल्ली में रहते हुए उसके प्रेम संबंध आकिल से हो गए। उसने हुकुम सिंह से गांव चलने की बात कही। दोनों स्टेशन पर पहुंचे तो वह स्टेशन से गायब हो गई और आकिल के घर पहुंच गई। आकिल के घर पर उसके साथ रहने लगी। मां व बच्चों को आकिल के यहां बुला लिया। कुछ दिन पहले पूनम की मां किसी बात पर उससे नाराज होकर मध्य प्रदेश चली गई। उसने आकिल से दोनों बच्चों को गांव छोड़कर आने को कहा, लेकिन आकिल बच्चों को बिजनौर में छोड़ गया। उसने मां के नंबर पर फोन करके मालूम करना चाहा तो मां का नंबर बंद था। बाल कल्याण समिति की न्यायाधीश कोकब अख्तर व बाल संरक्षण अधिकारी रूबी गुप्ता ने पूनम चौहान व उसके पति हुकुम सिंह से बच्चों को अपने साथ रखने के बारे में पूछा तो दोनों ने मना कर दिया। हुकुम सिंह ने कहा कि वह पूनम को साथ रख सकता है, लेकिन बच्चों को नहीं। पूनम ने कहा कि उसका रहने का खुद का ठिकाना नहीं है। वह बच्चों को अपने साथ नहीं रख सकती। दोनों ने बच्चों को रखने से किनारा कर दिया।
सीमा सिंह ने अपनाया बच्चों को
बच्चों को उनकी सगी मां ने तो ठुकरा दिया, लेकिन नई मां ने उनको अपनी ममता के आंचल की छांव दी है। तीन साल पहले सुनील चौहान ने सीमा सिंह से दूसरी शादी कर ली थी। जब सुनील को बच्चों के बारे में बताया गया तो वह अपनी दूसरी पत्नी सीमा के साथ बाल कल्याण समिति कार्यालय पहुंचा। सीमा सिंह ने कहा कि वह दोनों बच्चों को रखना चाहती है। वह उन्हें सगी मां से ज्यादा प्यार देगी। उसने इस संबंध में बाल कल्याण समिति कार्यालय में हलफनामा भी दिया। बाल कल्याण समिति की न्यायाधीश कोकब अख्तर व बाल संरक्षण अधिकारी रूबी गुप्ता ने दोनों बच्चों को उनके पिता सुनील चौहान व मां सीमा सिंह को सौंप दिया। सीमा सिंह के अब तक कोई बच्चा नहीं था।
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ग्राम प्रधान ने रखा पूरा ध्यान
दोनों बच्चे दो दिन तक गांव बास्टा के प्रधान सिराजुद्दीन के पास रहे थे। इस दौरान दोनों को वहां पर बहुत दुलार मिला। दोनों बच्चे अपने पिता के आने से पहले सिराजुद्दीन के साथ ही रहने की जिद कर रहे थे। सिराजुद्दीन भी बच्चों को बाल कल्याण समिति को बच्चों को सौंपने के बाद भी उनके साथ ही रहे।
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