बिजनौर में काकरान वाटिका में सहकारी सम्मेलन को संबोधित करते जिला कृषि अधिकारी डॉ अवधेश मिश्र
- यूरिया का आधा प्रयोग कर, शेष नाइट्रोजन की पूर्ति नैनो यूरिया से करें किसान
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। सहकारी सम्मेलन में मुख्य अतिथि इफ्को राज्य विपणन प्रबंधक अभिमन्यु राय ने किसानों को बताया कि वह गन्ने की फसल में प्रति बीघा 35 किलो यूरिया का ही उपयोग करें। क्योंकि यूरिया के अधिक उपयोग से जल, मिट्टी व वायु प्रदूषण बढ़ता है। यूरिया की मात्रा को आधा करते हुए शेष नाइट्रोजन की आपूर्ति के लिए नैनो यूरिया का प्रयोग करें।
यह बात उन्होंने बुधवार को काकरान वाटिका में आयोजित इफ्को के नैनो उर्वरकों पर आधारित सहकारी सम्मेलन में कही। उन्होंने कहा कि किसान खेतों में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश को 4:2:1 के अनुपात में उपयोग करें। जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र ने बताया कि समितियों व अन्य बिक्री केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध है। उन्होंने किसानों से यूरिया के उपयोग को कम करने तथा वर्ष में एक बार गोबर की खाद, हरी खाद अथवा जैव उर्वरक का उपयोग करने की सलाह दी। उप महाप्रबंधक इफ्को विपणन डॉ. आरके नायक ने बताया कि पौधों के लिए 21 पोषक तत्व आवश्यक होते हैं।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह ने बताया कि गन्ना पेड़ी को पौधे के सापेक्ष 25 प्रतिशत अधिक उर्वरक की आवश्यकता होती है। ग्राम झिलमिला के किसान गौरव डवास तथा ग्राम हरगनपुर के कुंवर शरद कुमार ने नैनो डीएपी के बारे में बताया। क्षेत्र अधिकारी इफ्को प्रवीण सिंह ने नैनो डीएपी उपयोग की विधि तथा मृदा परीक्षण विधि की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन उप महाप्रबंधक इफ्काे शैलेंद्र सिंह ने किया।