मंत्री अमर सिंह ने बेटे को सरकारी नौकरी देने से कर दी थी ना
बिजनौर। अपनों को मिल रहे लाभ के अवसर को कोई गंवाना नहीं चाहता लेकिन जिले के डॉ. अमर सिंह ऐसे मंत्री रहे हैं। जिन्होंने बेटे को सरकारी नौकरी देने से इनकार कर दिया था। आखिरी वक्त में नियुक्ति पर भी रोक लगवा दी। बेटे से भी बोल दिया कि तुम्हें नौकरी नहीं मिलेगी।
बिजनौर के गांव उलेढ़ा निवासी डॉ. अमर सिंह रामलहर के वक्त भाजपा के टिकट पर चांदपुर से विधायक बने। विधायक बनने के छह महीने बाद कल्याण सिंह की सरकार में स्वास्थ्य राज्य मंत्री बन गए। उनके छोटे बेटे डॉ. स्वर्ण सिंह बताते हैं कि स्वास्थ्य विभाग में वार्ड ब्वाय समेत अन्य पदों पर भर्ती निकली हुई थी। जिस पर मैने एडिशनल डायरेक्टर को शैक्षिक प्रमाण पत्र दे दिए। जिस पर नियुक्ति होने वाली थी। तभी वह गेस्ट हाउस में ठहरे हुए पिता जी से मिलने पहुंच गए। उन्होंने मालूम किया कि कैसे आए थे। जिस पर मैने नौकरी वाली बात बता दी। इस पर उन्होंने कहा कि तुम्हें नौकरी नहीं मिलेगी। एडी से भी फाइल रुकवा दी। संवाद
अटैची में मिले थे सिर्फ दो जोड़ी कपड़े
पूर्व मंत्री स्व. डॉ. अमर सिंह के बड़े बेटे संग्राम सिंह बताते हैं कि उनकी मौत होने के बाद जब अटैची खोलकर देखी तो उसमें सिर्फ दो जोड़ी कपड़े और एक बैंक पासबुक मिली। पासबुक में देखा गया तो खाते में सिर्फ 90 हजार रुपये ही बाकी थे।
मंत्री बनने तक चलाते रहे क्लीनिक
मंत्री रहे डॉ. अमर सिंह के पास बीएएमएस की डिग्री थी। विधायक बने तक तक गांव में ही क्लीनिक चलाते रहे, लेकिन मंत्री बनने पर क्लीनिक पर रहने का मौका नहीं मिल पाया। क्लीनिक पर उस दौर में दूर दूर से मरीज आया करते थे।
पूर्व पीएम ने किया था ईमानदारी का जिक्र
संग्राम सिंह बताते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने मध्यप्रदेश में एक जनसभा के दौरान उनके पिता मंत्री डॉ. अमर सिंह की ईमानदारी का जिक्र किया था। वहीं एक बार कल्याण सिंह खुर्जा में उन्हें मिले तो उनके पिता की ईमानदारी का जिक्र करना नहीं भूले। उन्होंने बताया कि सरकार गिरते ही उन्होंने मुरादाबाद में सरकारी गाड़ी छोड़ दी थी।