बिजनौर में सरकार ने भले खनन के पट्टे देने को हामी भर दी है, पर जिले में खनन के पट्टे नहीं हो पाएंगे। वन विभाग ने खनन के पट्टे लेने के दावेदारों के अरमानों पर पानी फेर दिया है।
नजीबाबाद का इलाका एलीफेंट जोन में आता है तो बिजनौर से चांदपुर तक गंगा का खादर क्षेत्र हस्तिनापुर सेंचुरी में है। इन इलाकों में खनन का पट्टा नहीं हो सकता। वन विभाग के अफसरों ने खनन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र देने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
सूबे में हाईकोर्ट की हरी झंडी मिलने के बाद खनन माफिया के साथ सत्ता दल के नेता भी गुपचुप तरीके से खनन के पट्टे लेने को सक्रिय हो गए थे। इन सबने फाइलें तैयार करनी शुरू कर दी थीं। वन विभाग ने इन लोगों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। नजीबाबाद क्षेत्र में कई ‘सोना’ उगलने वाली नदियां र्है। उन पर खनन माफिया की नजर थी। सत्ताधारी दल के नेता भी इनके पट्टे चहेतों को दिलाने के लिए पैरवी में लगे थे। रिजर्व फॉरेस्ट नजीबाबाद ने खनन के पट्टे लेने वालों को अनापत्ति प्रमाण पत्र देने से साफ मना कर दिया है। विभाग के अफसरों के मुताबिक, यह इलाका वर्ष 2009 से एलीफेंड जोन घोषित है। जोन की दस किलोमीटर की परिधि में पट्टे किसी सूरत में नहीं हो सकते।
आका भी नहीं कर पा रहे मदद
खनन के पट्टे लेने वालों की आका भी कोई मदद नहीं कर पा रहे हैं। वन विभाग के नियम-कानून के आगे सब बेबस है। वे कोई रास्ता निकालने की कोशिश में जुटे हैं, पर अब तक नाकाम हैं।
किसान को भी नहीं खनन की अनुमति
रिजर्व फोरेस्ट के डीएफओ पीके राघव के मुताबिक, 45 हजार हेक्टेयर में रिजर्व फॉरेस्ट है। अमानगढ़ तक उनका एरिया है। यह सब इलाका एलीफेंट जोन है। इस इलाके में कई बड़ी नदियां हैं। अमानगढ़ रेज में तो एलीफेंट जोन के साथ टाइगर रिजर्व भी लगता है। इन इलाकों में किसान को भी अपनी जमीन से खनन करने की इजाजत नहीं है। खनन के पट्टे लेने वाले उनसे अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने आ रहे हैं। उन्होंने अनापत्ति प्रमाण पत्र देने से साफ मना कर दिया है। किसी कीमत पर भी वे अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं देंगे। बिजनौर का इलाका हस्तिानरुपर सेंचुरी में र्है। वहां भी अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिल सकेंगे।
करोड़ों की कमाई के सपने टूटे
खनन से मोटी कमाई होती र्है। चंद दिन में खनन से जुडे लोग करोड़पति बन बैठते हैं। सपा सरकार में नदियों से खूब अवैध खनन हुआ। कहीं किसी पर रोक-टोक नहीं थी। योगी सरकार बनते ही अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लग गई। ख्ननन के पट्टे लेने की आस लगाए बैठे लोगों के करोड़ों कमाने के सपने चकनाचूर हो गए र्है।
कैसे बनेंगे मकान व सड़क
जिले में खननन के पट्टे नहीं होने से मकान व सड़कों का निर्माण कराने वालों के सामने भारी दिक्कत आएगी। उत्तराखंड से आने वाले रेत बजरी से ही जिले के लोगों को सब्र करना पड़ेगा। अभी भी उत्तराखंड से 170 रुपये कुंतल के रेट से रेत आ रहा है। मकान बनाने वाले व सड़कों का निमार्ण कराने वाले इस इंतजार में थे कि कब जिले में खनन शुरू हो ओर वह अपने काम शुरू करे।