जिले में फिर गिरने लगे दूध के दाम
बिजनौर। बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन की आशंका के चलते बढे़ शहरों से मजदूरों के पलायन का असर दूध के बाजार पर दिखने लगा है। बाजार में दूध की मांग कम होने लगी है। जिसकी वजह से डेयरियों ने किसानों से खरीदे जाने वाले दूध के दाम भी कम करने शुरू कर दिए हैं। दूध के दाम कम होने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा। दूध के दाम अब भी पिछले साल के बराबर नहीं मिल रहे हैं।
जिले के किसान अब दूध का काम भी प्रमुखता से कर रहे हैं। डेयरियां किसानों से गांव-गांव जाकर दूध खरीदती हैं। जिले में तो दूध की खपत कम ही होती है, लेकिन जिले के किसानों का दूध दिल्ली, उत्तराखंड व आसपास के शहरों में जाता है। वहां पर जिले के दूध की काफी खपत होती है। इस समय गर्मी में दूध का उत्पादन कम होने लगता है। शादी का सीजन व लोगों के बाहर घूमने जाने की वजह से दूध की डिमांड बढ़ जाती है। ऐसे में किसानों को दूध के दाम अच्छे मिलते हैं। लेकिन अब कोरोना का प्रकोप फिर से बढ़ रहा है। लॉकडाउन की आशंका से आसपास के राज्यों में काम करने गए मजदूर भी अपने घरों को लौट रहे हैं। इसके अलावा सरकार ने शादी, ब्याहों में मेहमानों की संख्या सीमित कर दी है और होटलों में सख्ती से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने की बात कही है। ऐसे में दूध का उत्पादन कम होने के बाद भी खपत कम हो रही है। इसका असर दूध के दामों पर पड़ा है। मधुसूदन, जेके ने दूध के दाम एक एक रुपया प्रति लीटर घटा दिए हैं। बाकी डेयरियां भी बाजार की हालत की समीक्षा करने की बात कह रही हैं।
पिछले साल रसातल में चले गए थे दाम
पिछले साल लॉकडाउन से पहले किसानों से दूध 43 रुपये प्रति लीटर पर खरीदा जा रहा था। लेकिन लॉकडाउन के बाद दूध की डिमांड में भारी कमी आई थी। तब दूध के दाम गिरकर 32 रुपये प्रति लीटर रह गए थे। जिले से हर रोज अलग अलग डेयरियां एक लाख लीटर से अधिक दूध किसानों से खरीदती हैं। पराग के मुरादाबाद मंडल प्रभारी दलजीत सिंह के अनुसार बाजार की स्थिति को देखा जा रहा है। एक दो दिन में दूध के दामों पर कोई निर्णय लिया जाएगा।