हादसे के बाद परिवार में मातम
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कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला, लेकिन नहीं बची जान
ग्रामीणों ने तालाब के गहरे पानी में काफी तलाश के बाद काव्या को बाहर निकाला। परिजन उसे तत्काल स्थानीय चिकित्सक के पास ले गए। चिकित्सक ने जांच के बाद बताया कि बच्ची के शरीर में पानी भरने और दम घुटने के कारण उसकी मौत हो चुकी है। मासूम की मौत की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया।
मां-बाप बदहवास, गांव में पसरा मातम
अपनी चार साल की बेटी का बेजान शरीर देखकर मां मीनाक्षी और पिता सन्नी बदहवास हो गए। हंसती-खेलती काव्या की अचानक मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना ने पूरे गांव को झकझोर दिया। देर रात काव्या का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
पुलिस को नहीं दी गई हादसे की सूचना
सीओ सरधना आशुतोष कुमार ने बताया कि हादसे के संबंध में पुलिस को सूचना नहीं दी गई थी। जानी पुलिस को गांव भेजकर घटना की जानकारी मांगी गई है।
ग्रामीणों ने बिना एक पल गंवाए तालाब में छलांग लगा दी। पानी की हर लहर के साथ मां की सांसें अटक रही थीं। कुछ ही देर में जब एक ग्रामीण काव्या के छोटे से, ठंडे पड़े शरीर को अपनी बाहों में समेटे बाहर निकला। काव्या की आंखें बंद थीं, उसके होंठ शांत थे। जो आंखें कुछ देर पहले चमक रही थीं, वे अब बंद थीं। मां ने ग्रामीणों से कहा कि काव्या को जल्दी डॉक्टर के पास ले चलो।
इस बीच पिता सन्नी मजदूरी करके लौटे। वह भागकर अपनी लाडली के पास पहुंचा, उसे सीने से लगाया, तुरंत काव्या को लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे। लेकिन डॉक्टर ने काव्या को मृत घोषित कर दिया।
काव्या की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। शव घर पहुंचने पर बड़ी संख्या में ग्रामीण सन्नी के घर पहुंच गए। हर कोई इस हादसे से स्तब्ध नजर आया।
रोते हुए मां मीनाक्षी बार-बार यही कहती रही- काव्या तो बस गुड़िया जैसी थी। मां के यह शब्द सुनकर वहां मौजूद ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गईं। चंद मिनट पहले जिस बच्ची की हंसी घर में खुशियां भर रही थी, उसकी अचानक मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।