पालिका के कूड़ेदानों में फेंका जा रहा अस्पतालों का मेडिकल वेस्ट
बिजनौर। निजी अस्पताल जहां मरीजों को बेहतर उपचार देकर ठीक कर रहे हैं। वहीं, शहर में संक्रमण फैलाने की तैयारी कर रहे हैं। जिला मुख्यालय पर सरकारी और निजी अस्पतालों का मेडिकल वेस्ट नियमों को ताक पर रखकर नगर पालिका के कूड़ेदानों में डाला जा रहा है। जबकि यह कूड़ा शासन द्वारा नामित कंपनी द्वारा निस्तारित किया जाता है। कोई भी निजी अस्पतालों में इसे देखने को तैयार नहीं है।
कोरोना के प्रकोप को कम करने के लिए पूरी दुनिया ने ताकत झोंक रखी है। अभी कोरोना का कोई इलाज तो सामने आया नहीं है, फिलहाल स्वच्छता व सतर्कता को ही इसका इलाज बताया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग कोरोना को लेकर जिलेवासियों को जागरूक कर रहा है। जिलेवासियों से सैनिटाइजर से बार बार हाथ धोने, बड़े शहरों की यात्रा से बचने के लिए कहा जा रहा है। जिले के स्कूल, कॉलेजों को दो अप्रैल तक बंद कर दिया गया है। जिलेवासी भी अपनी तरफ से स्वच्छ रहने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। लेकिन प्राइवेट चिकित्सक जिलेवासियों को रोग बांट रहे हैं। नियमों को ताक पर रखकर निजी अस्पतालों का मेडिकल वेस्ट नगर पालिका के कूड़ेदानों में डाला जा रहा है। कोई भी इसे देखने को तैयार नहीं है। मरीजों को लगाए जाने वाले कैनुला, सिरिंज, कॉटन, पट्टी आदि नगर पालिकाओं के कूड़ेदानों में ही फेंकी जा रही हैं। नगर पालिका भी इस कूड़े को उठाकर सड़क किनारे डलवा देती है। जिससे संक्रमण फैल सकता है।
व्यापारी नहीं रखने देते कूड़ेदान
अधिकांश व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों के आसपास भी नगर पालिका का कूड़ेदान नहीं रखने देते हैं। ऐसे में पालिका निजी अस्पतालों के सामने ही कूड़ेदान रखती हैं। चिकित्सक भी कूड़ा ठिकाने लगाने के लालच में पालिका को मना नहीं करते हैं। चिकित्सक मेडिकल वेस्ट कूड़ेदान में ठिकाने लगाने में तो पालिका कर्मचारी इसे भरने में पूरी लापरवाही दिखाते हैं। पालिका कर्मचारी कूड़ा भरते हुए काफी कूड़ा बिखेर देते हैं। इससे संक्रमण का खतरा बना रहता है।
कंपनी को कूड़ा देने का है प्रावधान
निजी अस्पताल सीएमओ कार्यालय द्वारा नामित सिनर्जी कंपनी को मेडिकल वेस्ट देते हैं। इसके बदले कंपनी हर महीने अस्पतालों से हजारों रुपये लेती है। लेकिन फिर भी काफी सर्जरी का मैटीरियल कूड़ेदानों में ही ठिकाने लगाया जाता है। सरकारी अस्पताल में भी मेडिकल वेस्ट पीछे की ओर आम के बाग में ही डाला जा रहा है। जब काफी कूड़ा इकट्ठा हो जाता है तो उसे जला दिया जाता है।
ये हो सकते हैं रोग
खुले में पड़े मेडिकल वेस्ट से कोरोना के साथ साथ एड्स, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी जैसे संक्रामक रोग हो सकते हैं। ये सभी रोग जानलेवा होते हैं। इसके अलावा खुले में मेडिकल वेस्ट डालने से वायु प्रदूषण भी होता है। गंदी कॉटन से भी कई तरह के रोग हो सकते हैं। बड़े अस्पताल तो कंपनी से कांट्रेक्ट करते हैं लेकिन छोटे चिकित्सालय बनाने वाले चिकित्सक ऐसा कोई कांट्रेक्ट नहीं करते हैं। ये मेडिकल वेस्ट को कभी कभी सीधे नगर पालिका के वाहनों में डालते हैं।
निजी अस्पतालों पर होगी कार्रवाई : ईओ
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी दुर्गेश्वर त्रिपाठी के अनुसार निजी अस्पताल संचालक कूड़ेदानों में मेडिकल वेस्ट नहीं डाल सकते हैं। अगर ऐसा कोई कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। प्रकरण की जांच कराई जाएगी।