- मलिन बस्तियों में रहने वाले बच्चे भी हो रहे टीबी का शिकार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। कुपोषण की मार झेल रहे बच्चे तमाम बीमारियों से ग्रसित हैं। इनमें से ही एक बीमारी टीबी है। कुपोषित बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से उन्हें टीबी का वायरस जकड़ रहा है। जिले में इस समय 210 बच्चे टीबी का इलाज करा रहे हैं। बच्चों को टीबी की दवाई के अलावा कुपोषण दूर करने के लिए पोषाहार लेने में बारे में बताया जा रहा है।
सरकार ने साल 2025 तक टीबी खत्म करने का लक्ष्य रखा है। जिसके चलते घर-घर टीबी खोजो अभियान भी चलाया जा रहा है। बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि बच्चे भी टीबी का शिकार हो रहे हैं। इसका मुख्य कारण कुपोषण और मलिन बस्तियां है। क्योंकि कुपोषित बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर रहती है। इसके अलावा मलिन बस्तियों में लोग एक-दूसरे के ज्यादा पास रहते हैं। जिससे एक व्यक्ति को टीबी होने पर दूसरे को टीबी का ज्यादा खतरा रहता है। जिसके चलते स्वास्थ्य विभाग लोगों को टीबी से बचाव करने के लिए जागरूक कर रहा है। जो बच्चे कुपोषित हैं, उन्हें पोषाहार का सेवन करने की सलाह दी जा रही है। जिले में इस समय करीब 5609 टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है।
वर्जन
कुपोषित बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से वह टीबी की चपेट में आ रहे हैं। कुपोषण से बाहर निकालने के लिए बच्चों को अच्छा पोषाहार युक्त भोजन दें। इसके अलावा जो बच्चे टीबी से ग्रसित हैं, उनका इलाज किया जा रहा है - डॉ. वीएस रावत, जिला क्षय रोग अधिकारी