मॉल बंद, दुकानदारों पर बढ़ रहा है किराया
बिजनौर। खानपान और फिल्म देखने का शौक पूरा करने के लिए शॉपिंग मॉल पहली पसंद रहते हैं। लेकिन मॉल को लगा कोरोना का ग्रहण अब तक नहीं हटा है। बाजार खुलने की छूट तो दे दी गई लेकिन मॉल की दुकानें अब तक बंद हैं। दुकानदारों पर किराया और बिजली का बिल लगातार चढ़ रहा है। दुकानदार टकटकी लगाकर सरकार की ओर देख रहे हैं।
शास्त्री चौक के पास बना शॉपर्स प्राइड मॉल जिले का सबसे पहला मॉल है। यहां पर 57 दुकानें और दो सिनेमा हॉल हैं। लोग छुट्टी पर परिवार के साथ खाने या फिल्म देखने के लिए यहीं आते हैं, लेकिन मॉल का शो शुरू ही नहीं हुआ है। कोरोना कर्फ्यू खुले दूसरा सप्ताह शुरू होने जा रहा है। कोरोना कर्फ्यू के समय भी बाजार के दुकानदार दुकानें खोल ही लेते थे, लेकिन मॉल की दुकानों में अप्रैल के अंत से लेकर अब तक ताले ही लटके हुए हैं। यहां के दुकानदारों और वहां काम करने वालों को आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही है।
एसआरएस सिनेमाज में ही करीब 35 कर्मचारी काम करते हैं। पिछले साल मार्च से अब तक सिनेमा की दोनों स्क्रीन पर केवल चार महीने ही फिल्में प्रदर्शित हुईं जबकि यहां का केवल बिजली का फिक्स बिल ही हर महीने ढाई लाख से अधिक और गर्मियों में पांच लाख तक आता है। मॉल से अलग बने बाकी शोरूम खुलने लगे हैं, तो वहां भी अभी पहले के बराबर ग्राहक नहीं आ रहे हैं।
मॉल से ज्यादा भीड़ बाजार में
शॉपर्स प्राइड मॉल के प्रबंधक केडी सिंह प्रजापति के अनुसार मॉल के दुकानदारों की ओर सरकार का कोई ध्यान नहीं है। इनके खुलने की भी अनुमति होनी चाहिए। बाजार में जितनी भीड़ रहती है उसके मुकाबले तो मॉल में कम ही लोग आते हैं।
बिल और लाइसेंस फीस में मिले छूट
एसआरएस सिनेमाज के मैनेजर रितिक का कहना है कि महीनों से शो नहीं चले हैं। सिनेमा को दर्शकों की कम संख्या के साथ ही सही, लेकिन खुलने की अनुमति मिलनी चाहिए। सिनेमाज को बिजली के बिल और लाइसेंस फीस में भी मदद की उम्मीद है।
दुकान बंद होने पर भी जा रहा कैंप चार्ज
मॉल के दुकानदार सैय्यद जिया हैदर जैदी के अनुसार बंदी के बाद भी वे और बाकी दुकानदार हर महीने सात रुपये स्क्वायर फीट का कैंप चार्ज और इस पर भी जीएसटी देते हैं। मानवीय आधार पर अपने कर्मचारियों को वेतन भी दे रहे हैं। सरकार को मॉल के दुकानदारों को टैक्स, बिजली बिल आदि में छूट देनी चाहिए।