पंचायतों के आरक्षण में बड़ा फेरबदल
बिजनौर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के आरक्षण की घोषणा हो गई है। न्यायालय के आदेश पर 2015 को आधार वर्ष मानकर नए सिरे से आरक्षण हुआ है। इससे जिले में प्रधान के आरक्षण पर बड़ा बदलाव हुआ है। एससी के लिए आरक्षित पंचायत दूसरी केटेगरी में चली गई हैं। ब्लाक प्रमुख की आधी सीटों के आरक्षण बदल गए हैं। नए आरक्षण ने काफी दावेदारों के मुकद्दर की खिड़की खोल दी है वहीं मनमाफिक आरक्षण नहीं आने से कुछ के चेहरे पर मायूसी है।
इसे मुकद्दर का खेल कहते हैं। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रधान पद के पहले आरक्षण से जो लोग कल तक मायूस थे, आरक्षण में बदलाव से उनके चेहरे खिले हैं। तिकड़मबाजी से एक ही पंचायत पर लंबे समय से काबिज चल रहे दावेदारों के हाथ से खिसकी पंचायत फिर झोली में आ गई है। जिले में 1123 पंचायत हैं। इनमें एक पंचायत अनुसूचित जनजाति, 250 पंचायत अनुसूचित जाति, 304 पंचायत ओबीसी तथा 185 पंचायत स्त्री के लिए आरक्षित हुई हैं।
शासन के निर्देश पर पहले वर्ष 1995 को आधार वर्ष मानकर वर्ष 2021 का आरक्षण हुआ था। इस आरक्षण में जो पंचायत 1995 से 2015 तक एससी को आरक्षित नहीं हुई थी, उन्हें एससी के लिए आरक्षित कर दिया गया था। इस नियम में पंचायत राजनीति के बड़े बड़े दिग्गज लपेटे में आ गए थे। दावेदारों ने आरक्षण के खिलाफ 565 आपत्ति दर्ज कराई थी। इनमें सबसे अधिक आपत्ति 327 प्रधान पदों के आरक्षण पर थी।
न्यायालय में आरक्षण के आधार वर्ष को लेकर वाद दायर हुआ था। न्यायालय के आदेश के बाद वर्ष 2015 को आधार वर्ष मानकर पुन: आरक्षण किया गया है। कई दिन से दावेदार दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। आज सुबह से दावेदार समर्थकों के साथ विकास भवन में डटे थे। शनिवार को शाम करीब चार बजे आरक्षण का प्रकाशन हुआ। ब्लाक व डीपीआरओ दफ्तर में आरक्षण देखने वालों का हुजूम लग गया।।
प्रधान आरक्षण में 40 प्रतिशत तक बदलाव
जिले में प्रधान पद के लिए 740 पंचायत विभिन्न केटेगरी में आरक्षित हैं। वर्ष 1995 के आधार पर किए गए आरक्षण में एससी की कम आबादी वाली पंचायत एससी को आरक्षित कर दी गई थी। वर्ष 2015 के आधार पर किए गए नये आरक्षण में इन पंचायतों की केटेगरी बदल गई है। ये पंचायत ओबीसी या महिला को आरक्षित हो गई हैं। जिले की अन्य पंचायतों में भी समानुपातिक बदलाव है। प्रथम दृष्टया अनुमान है कि कि पहले के मुकाबले 35 से 40 प्रतिशत आरक्षण बदल गया है।
अनेक पंचायत फिर मठाधीशों के कब्जे में
शासन के वर्ष 1995 के आधार पर किए गए आरक्षण में जिले की करीब 250 पंचायत ऐसी थीं जो 1995 से 2015 तक एससी को आरक्षित नहीं हुई थी। इस फैसले से मठाधीशों में खलबली मची थी। अब वर्ष 2015 के आधार पर हुए आरक्षण ने तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। ये पंचायत अन्य केटेगरी में पहुंचकर पुन: उन लोगों के कब्जे में आ गई हैं, जो लंबे समय से इन पंचायतों पर काबिज थे।
पांच ब्लॉक प्रमुखों की सीटों पर आरक्षण बदला
बिजनौर। जिले में 11 ब्लॉक है। इन ब्लॉक में 11 ब्लाक प्रमुख चुनेे जाने है। वर्ष 2015 के आधार पर किए गए आरक्षण में वर्ष 1995 के आधार पर किए गए पांच आरक्षण बदल गए हैं। नूरपुर ब्लॉक प्रमुख का पद पहले अनारक्षित था वह अब स्त्री के लिए आरक्षित हो गया हैं। मोहम्मदपुर देवमल ब्लॉक प्रमुख का पद पहले अनुसूचित जाति को आरक्षित था, जो अब अनुसूचित जाति स्त्री को रिजर्व हुआ है। इसी प्रकार जलीलपुर ब्लॉक का अनुसूचित जाति स्त्री से बदलकर ओबीसी महिला हो गया है। किरतपुर ब्लॉक प्रमुख पद ओबीसी स्त्री से बदलकर अनुसूचित जाति को आरक्षित हो गया है। हल्दौर ब्लॉक प्रमुख पद पहले स्त्री को आरक्षित था। यह पद अनारक्षित कर दिया है।