गंगा-मालन के संगम पर शकुंतला सरोवर में खिलेंगे कमल
बिजनौर। मालन और गंगा का संगम राजा दुष्यंत और शकुंतला की प्रणय स्थली रहा है। कालिदास के संस्कृत महाकाव्य अभिज्ञान शाकुंतलम में भी इसका जिक्र है। इस स्थली को सजाने और संवारने की कवायद चल निकली है। इस संगम पर शकुंतला सरोवर तैयार हो चुका है, जिसमें जल्द ही कमल के फूल खिलते नजर आएंगे, इसमें तैरती बत्तख पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती दिखेंगी।
कण्व आश्रम अब जैविक खेती के लिए भी जाना जाएगा। किसान चौपाल से धरतीपुत्रों को प्रशिक्षण दिलाए जाने की योजना है। इस योजना को जल्द से जल्द धरातल पर लाने के लिए डीएम उमेश मिश्रा और एसपी डॉ. दिनेश सिंह ने भी मौका मुआयना किया। बृहस्पतिवार को डीएम, एसपी ने ग्राम रावली स्थित कण्व ऋषि आश्रम का निरीक्षण किया। डीएम ने कण्व ऋषि आश्रम के सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए विकसित करने के निर्देश दिए। कण्व ऋषि आश्रम में कृषकों के प्रशिक्षण के लिए प्राकृतिक बांस और प्राकृतिक घास से निर्मित एक प्रशिक्षण कक्ष और चौपाल बनाने के भी निर्देश एसडीएम सदर को दिए। साथ ही कण्व आश्रम की बाकी जमीन पर बीजामृत, जीवामृत और मल्चिंग के द्वारा प्राकृतिक खेती के रूप में क्षेत्र को विकसित करने का निर्णय लिया गया।
जंगली जीवों के वास के लिए भी तालाब विकसित करने एवं आश्रम में ही एक गोशाला बनाने के भी निर्देश दिए। इसी गोशाला में रहने वाले गोवंश के गोबर और मूत्र को जैविक खेती में इस्तेमाल किया जाएगा। डीएम ने 15 दिन में तेजी से उक्त कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर एसडीएम मोहित कुमार, तहसीलदार अनुराग सिंह भी मौजूद रहे।
चौपाल को दिया जाएगा देसी लुक
कण्व आश्रम में किसानों को प्रशिक्षण दिए जाने को चौपाल बनेगी। इस चौपाल के मंच पर बांस और छप्पर की छत रहेगी। चौपाल के सामने किसानों के बैठने के लिए बैंच भी बांस की ही बनाई जाएगी। इसके अलावा पचास हजार बांस के पौधे भी लगाए जाने की योजना है। जैविक खेती का प्रदर्शन भी किया जाएगा। करीब पचास बीघा जमीन में एक-एक बीघा के छोटे-छोटे खेत बनाकर जैविक तरीके से खेती की जाएगी। जिससे किसानों को दिखाकर अपने खेतों में भी जैविक खेती करने के लिए प्रेरित किया जा सकेगा।
फिर विख्यात होगा गंगा-मालन का संगम : डीएम
डीएम उमेश मिश्रा ने कहा कि गंगा और मालन के संगम को शास्त्रों में भी नर-नारायण भी धरती कहा गया है। इसका गौरवशाली इतिहास है। यहां पर्यटक आएंगे और राजा दुष्यंत, शकुंतला के अलावा कण्व ऋषि के बारे में जानेंगे। किसान यहां प्राकृतिक खेती के गुर सीखेंगे। यहां पर कार्य तेजी से चल रहा है और नए साल तक काफी कार्य पूरा करा दिया जाएगा।