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रात के अंधेरे में जीवन के उजियारे की तलाश

Sun, 26 Aug 2018 12:11 AM IST
अमर उजाला/बिजनौर
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लापता लोगों की तलाश करती एनडीआरएफ की टीम। - फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में  शुक्रवार को गंगा में नाव पलटने के बाद लापता हुए 11 लोगों में से दो महिलाओं के शव मिल गए हैं लेकिन 9 लोगों की तलाश जारी है। अंधेरे व बारिश के बाद भी परिजन गंगा में डूबे लोगों की तलाश में रातभर तीन गांवों के लोग गंगा के तट पर डेरा डाले रहे। उन सभी को ये आस है कि गंगा में समाए उनके परिजन कहीं किसी टापू या किनारे पर झाड़ियों में फंसे हुए जिंदा मिल सकते हैं। सुबह की इंतजार में गंगा की ओर देखते हुए उनकी आंखें पथरा गईं। दिन निकलने पर वे खुद ही नाव लेकर परिजनों की खोज में जुट गए।
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डैबलगढ़, राजारामपुर व चाहड़वाला के गांव वालों को रात भर नींद नहीं आई। ये लोग इस इंतजार में रहे कि गंगा में डूबे उनके परिजन उन्हें मिल जाएं। तीनों गांवों के लोगों ने रात में ही रावली से बैराज तक गंगा के किनारे डेरा डाल दिया। उन्हें इस बात की भी परवाह नहीं रही कि सुनसान जंगल में वे बारिश व अंधेरे में कैसे रहेंगे। रात भर ये लोग गंगा किनारे ही डेरा डाले रहे। खाने पीने की सुध भी नहीं रही। गांव वालों की मानें तो एक मिनट के लिए भी उनकी पलक नहीं झपकी। गंगा की तरफ रात भर ये आंखें गड़ाए रहे। देखते रहे कि कोई तो उन्हें गंगा किनारे टापू या झाड़ी में फंसा मिल जाए। टॉर्च हाथ में लिए ये गांव वाले बार बार गंगा की ओर रोशनी करते रहे। उनकी आंखों से लगातार आंसू बहते रहे, लेकिन फिर भी आस रही कि परिजन जिंदा होंगे। दिन निकलने पर ये लोग नाव लेकर खुद परिजनों की तलाश में निकल गए। दिन में करीब साढ़े दस बजे मीना देवी झाड़ी में फंसी जरूर मिली, उसके अलावा उन्हें कोई नहीं मिला।
गंगा में समाए लोगों के न मिलने से तीनों गांवों में सन्नाटा पसरा रहा। गांव में मातम का माहौल है। गांव में मौजूद लोग गंगा किनारे पड़े लोगों से एक एक पल की खबर ले रहे हैं। मोबाइल पर मालूम कर रहे हैं कि कोई और मिला या नहीं। गांव के लोगों ने गंगा का तट नहीं छोड़ा है। एनडीआरएफ व पीएसी के गोतोखारों को ये भी बता रहे हैं गंगा में डूबे लोग कहां मिल सकते हैं। इन टीमों के ये लोग मदद कर रहे हैं। इनके साथ रावली के लोग भी जुड़ गए हैं।
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जानवरों की खातिर मौत की धार पर इंसान
बिजनौर में शुक्रवार को गंगा की धारा ने दो जिंदगी लील ली और नौ लोग अभी भी लापता हैं। लापता लोगों के परिजन गंगा किनारे रोते हुए जमे हुए हैं। इतने भयानक मंजर के बाद भी तटीय गांवों के लोग पशुओं का चारा लेने के लिए गंगा की उफनती लहरों को शनिवार को भी पार करके खेतों पर गए। हालांकि डीएम ने इनके गंगा पार जाने पर रोक लगा दी थी। पर इसका असर किसानों पर दिखाई नहीं दिया। मंडावर के खादर क्षेत्र में एक दर्जन से ज्यादा गांव बसे हैं। यहां के किसानों के खेत गंगा पार भी हैं। खेती ही इन गांव वालों की आमदनी का इकलौता जरिया है। इसके अलावा खादर क्षेत्र में कोई उद्योग धंधा या रोजगार का अन्य साधन नहीं है। शुक्रवार को हुए हादसे के बाद डीएम अटल कुमार राय ने गांव वालों के गंगा पार से चारा लाने पर रोक लगा दी थी। कहा था कि फिलहाल कोई किसान नाव से गंगा पार नहीं जाएगा। इसके बाद भी तटीय गांव के लोग सुबह ही नाव से चारा लेने के लिए गंगा पार निकल गए। कई गांव के लोग तो अपने साथ पशुओं को भी उफनती लहरों में बिना नाव के गंगा पार ले गए। रावली गांव के सामने गंगा पार तमाम लोग चारा लेने गए थे। इनके लौटने का परिजन इंतजार करते रहे। मोबाइल पर परिजन इनसे बात करते रहे। दोपहर बाद ये लोग चारा लेकर लौटे। इनके पीछे पशु भी आ गए। यही हाल अन्य तटीय गांव के लोगों का भी रहा। इन गांवों में भी कोई भी गंगा पार से चारा लाने से बाज नहीं आया। दिन निकलते ही गांव वालों की टोली चारा लाने के लिए फिर से इकट्ठी हो गई। नाव से ये लोग चारा लेने गए। गांव वालों का कहना था कि गंगा पार से चारा नहीं लाएंगे तो पशुओं का पेट कैसे भरेंगे। चारा नहीं मिलने से पशु भूखे मर जाएंगे। प्रशासन को अगर उनकी इतनी चिंता है तो गंगा पार से चारा लाने का पुख्ता इंतजाम करे।

गंगा किनारे लगा रहा नेताओं का तांता
बिजनौर में  गंगा में गांव वालों की नाव डूबने के दूसरे दिन भी नेताओं का गंगा तट पर तांता लगा रहा। पूर्व राज्यमंत्री सपा नेता स्वामी ओमवेश ने गांव वालों को 20 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी।
नाव डूबने के बाद केवल भाजपा पदाधिकारी ही मौके पर पहुंचे थे। शनिवार को भाजपा विधायक सुचि मौसम चौधरी भी गंगा किनारे पहुंची। उन्होंने गांव वालों से बात की। मृतकों के परिजनों को ढांढ़स बंधाया। कहा कि सरकार गंगा में डूबे लोगों को तलाश कराने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। पूरी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। विधायक ने तहसीलदार बृजेश सिंह व रालोद जिलाध्यक्ष अशोक चौधरी, आशु राणा, प्रभा चौधरी भी रावली गए। सपा जिलाध्यक्ष अनिल यादव, पूर्व सांसद यशवीर सिंह व पूर्व राज्यमंत्री स्वामी ओमवेश, पूर्व जिलाध्यक्ष राशिद हुसैन भी लोगों के बीच गए। उन्होंने मृतकों के परिजनों को ढांढ़स बंधाया। सपा नेताओं ने जिला प्रशासन से मृतकों के परिजनों को आर्थिक मदद व सरकार से मुआवजा दिलाने की मांग की गई। साथ ही सरकार से खादर क्षेत्र में पुल बनवाने की मांग की गई। सपा नेताओं ने कहा कि जरूरत हुई तो वे पुल बनवाने की मांग को लेकर आंदोलन करेंगे।

चमरावाला में बाढ़ जैसे हालात
नगीना में बारिश के कारण गांव चमरावाला में खो नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण गांव वासियों को चिंता सताने लगी है। सिंचाई विभाग द्वारा दो वर्ष पूर्व गांव की सुरक्षा के लिए बनाई गई नौ नोकियों में से नोकी नंबर एक के बह जाने से गांव चमरावाला के निवासियों की चिंता बढ़ गई हैं। गांव के ग्रामीणों राजेन्द्र सिंह, अवधेश कुमार एडवोकेट, सुरेश कुमार ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में गांव के किसानों की सैकड़ों बीघा जमीन खो नदी में समा गई है। प्रशासन ने इस समस्या का समाधान आज तक नहीं किया गया। गांव की सुरक्षा के लिए जो नोकियां बनाई गई उनसे भी गांव की सुरक्षा नहीं हो पा रही है। पूर्व में धनीराम, नवरतन, अजय कुमार, गजराज, हेमराज, चरण सिंह की सैकड़ों बीघा भूमि व फसल, अली हसन का मकान, प्राईमरी स्कूल का कुछ भाग, देवता का टीला व एक बड़ा पीपल का पेड़ बह गया था उसका भी मुआवजा अभी तक ग्रामीणों को नहीं मिल पाया है। क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांव तौफीकवाला, चमरावाला, जग्गूवाला, इस्लामाबाद, भगवानपुर आदि बुरी तरह प्रभावित हैं।  
नगीना बढापुर मार्ग पर पानी बढ़ने से एक प्राइवेट बस डूबने से बाल बाल बच गई। सूचना मिलने पर एसडीएम डा. गजेंद्र सिंह ने क्षेत्र का दौरा किया और सभी लेखपालों को प्रभावित गांवों की चौकसी बरतने के निर्देश दिए हैं।       
स्कूल का भवन गिरा
नगीना में मोहल्ला मुस्लिम कटेरा स्थित एक जर्जर स्कूल का भवन लगातार तेज वर्षा के कारण शनिवार की सुबह करीब आठ बजे भरभरा कर गिर गया। भवन का मलवा एक धार्मिक स्थल के सामने व सड़क पर गिरने से मौहल्ले का मार्ग अवरुद्ध हो गया। इसके कारण दूसरे मोहल्लों से होकर स्कूली बच्चों व मोहल्ले वासियों को जाना पड़ा। भवन गिरन के मामले में एसडीएम  गजेंद्र पाल सिंह ने बताया कि इस भवन का एक वाद न्यायालय में विचाराधीन है ।इस कारण पुलिस की निगरानी में सड़क से मलवा शीघ्र हटवाकर मार्ग सुचारु करा दिया जाएगा।       
अफजलगढ़ सिंचाई विभाग परिषद में खड़ा एक बड़ा पेड़ सड़क पर आ गिरा । इसके कारण एक चिकित्सक का मकान क्षतिग्रस्त होने से बाल बाल बच गया। यहां का मार्ग पर अवरुद्ध हो गया। बाद में सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने गिरे पेड़ की शाखाओं को कटवाकर मार्ग सुचारू करा दिया। 
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