बिजनौर। लोकसभा चुनाव ने माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों के दाखिलों का समीकरण बिगाड़ दिया है। पिछले सालों में शिक्षा सत्र शुरू होते ही विद्यालयों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की भीड़ शुरू हो जाती थी। परंतु इस बार विद्यालयों में दाखिलों के नाम पर सन्नाटा पनपा है। विद्यार्थी दाखिलों के लिए नहीं आ रहे हैं। विद्यालयों का मानना है कि दाखिलों में - देरी का विद्यालय की कुल छात्र संख्या पर असर पड़ेगा।
जिले में लोकसभा चुनाव प्रथम चरण में है। माहौल चुनाव रंग में रंगा है। जिसका असर माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों के दाखिलों पर दिखाई पड़ रहा है। शिक्षा सत्र के दाखिले एक अप्रैल से शुरू हो गए है। सामान्यतया स्कूलों के ग्रीष्मकालीन अवकाश के लिए बंद होने तक दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की विद्यालयों में लाइन लगी रहती थी। परंतु इस बार लोकसभा चुनाव ने दाखिलों का समीकरण बिगाड़ दिया है।
- प्रचार प्रसार में फिसड्डी
माध्यमिक विद्यालय प्रचार-प्रसार में फिसड्डी है। पब्लिक स्कूल अभिभावकों को आकर्षित करने के लिए गांव, कस्बों व शहरों में व्यापक प्रचार करते हैं। उपलब्धियां गिनाते हैं। जबकि यूपी बोर्ड के माध्यमिक विद्यालय प्रचार-प्रसार के नाम पर शून्य है। केवल वित्त विहीन विद्यालयों के शिक्षक ही गांवों में संपर्क अभियान चलाते हैं। शासन की माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, मध्याह्न भोजन आदि योजना संचालित है। ग्रामीणों को योजनाओं का पता ही नहीं चलता। जिसका असर दाखिलों पर पड़ता है।
- चुनाव ने बिगाड़ा खेल
जिले में प्रथम चरण में चुनाव है। माध्यमिक शिक्षकों की ड्यूटी लोकसभा चुनाव में है। शिक्षक मास्टर ट्रेनर, पीठासीन अधिकारी की ड्यूटी कर रहे हैं। शिक्षकों के स्कूल में नहीं होने से दाखिलों पर असर है। बताया जाता है कि शिक्षा सत्र के शुरू में कुछ विद्यार्थी व अभिभावक स्कूल आए परंतु शिक्षकों के नहीं मिलने पर लौट गए। आरोप है कि अब तो विद्यार्थियों ने दाखिले के लिए आना बंद कर दिया है।