बिजनौर में स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू संभावित मरीजों का सीरम जांच के लिए भिजवा दिया, लेकिन विभाग जांच में रुचि नहीं ले रहा है। पांच दिन भी जांच रिपोर्ट का पता नहीं है। सभी रोगियों का उपचार चल रहा है।
नगीना क्षेत्र के गांव बघाला को करीब डेढ़ सप्ताह से बुखार ने जकड़ रखा है।
गांव में बुखार पीड़ितों की काफी संख्या का पता चलने पर स्वास्थ्य विभाग ने 19 सितंबर को गांव में स्वास्थ्य कैंप लगाया और बुखार से पीड़ित 500 से अधिक मरीजों का उपचार किया। टीम ने 23 ऐसे मरीज चिह्नित किए, जिन्हें डेंगू की संभावना थी। टीम ने 23 मरीजों का सीरम लेकर संक्रामक विभाग बिजनौर को भेज दिया।
उसी दिन किरतपुर पीएचसी पर उपचार के लिए पहुंचे गांव चिड़ियापुर के युवक मेें डेंगू संभावित लक्षण दिखाई दिए। संक्रामक विभाग ने सभी 24 डेंगू संभावितों का सीरम जांच के लिए मेरठ मेडिकल कॉलेज भेज दिया। लेकिन अभी तक उनकी जांच पूरी नहीं हो पाई है। विभाग अधिकारी इस बारे में वर्कलोड अधिक होने की बात कर रहे हैं।
संभावना पर ही चल रहा उपचार
गांव बघाला में डेंगू संभावितों का उपचार अनुमान से ही चल रहा है। विभाग जांच रिपोर्ट आने से पूर्व डेंगू रोगी मानने को तैयार नहीं है। ऐसे में यह मालूम नहीं है कि रोगियों को डेंगू बुखार का उपचार दिया जा रहा है अथवा सामान्य बुखार का। जिला मलेरिया अधिकारी ब्रजभूषण का कहना है कि जांच रिपोर्ट जल्द आ जाएगी। मेरठ मेडिकल कॉलेज में वर्कलोड अधिक होने के कारण देरी हुई है। पुन: सूचना भिजवाकर संभावितों के सीरम की जल्द जांच पूरी कराई जाएगी और रिपोर्ट मंगवाई जाएगी।
गांव में दो टीमें लगी बुखार रोगियों के उपचार में
नगीना क्षेत्र के गांव बघाला में बुखार से पीड़ितों का इलाज बराबर जारी है। स्वास्थ्य विभाग को दो टीमें बराबर निगरानी रखे हुए हैं। तहसीलदार परमानंद झा ने बताया कि वर्तमान में बुखार से पीड़ित व्यक्तियों को दवा दिए जाने के बाद काफी राहत पहुंची है। गांव की सफाई व्यवस्था को ठीक किया गया है।
उन्होंने बताया कि एक सप्ताह के भीतर पूरे गांव की सफाई करा कर फॉगिंग कराई जाएगी। उन्होंने गांव वासियों से पानी उबाल कर पीने और अपने आसपास पानी एकत्र न होने देने की सलाह दी है।