विश्व सीओपीडी दिवस
-प्रदूषण, सिगरेट के धुएं से फेफड़े हो रहे कमजोर, सांस लेने में दिक्कत
-ठंड बढ़ने के साथ ही सीओपीडी के मरीज बढ़ने लगे
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। सिगरेट के धुएं से छल्ले बनाने में लोगों की जिदंगी उलझ रही है। समय से पहले लोगों में सीओपीडी की समस्या बढ़ रही है। मेडिकल अस्पताल में रोजाना सीओपीडी के 10 मरीज तक पहुंच रहे हैं। अब ठंड बढ़ने के साथ सीओपीडी के मरीजों की संख्या में इजाफा होगा।
विश्व सीओपीडी दिवस आज मनाया जा रहा है। इसे क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज के नाम से जाना जाता है। सीओपीडी ठीक नहीं होने वाली बीमारी है। जिसे एक बार सीओपीडी हो गई, वह इस बीमारी से बाहर नहीं निकल सकता है। प्रदूषण, सिगरेट के धुएं से श्वासनली पर सूजन आ जाती है। जिससे सांस लेने में परेशानी होती है।
चिकित्सकों का कहना है कि व्यक्ति जिस मार्ग से ऑक्सीजन लेता है, उसे एयरवेज कहते हैं। जबकि पेरनकाइमा ऑक्सीजन को ग्रहण करता है। सिगरेट का धुआं इन्हे प्रभावित करता है। जिससे व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होती है। लगातार यह समस्या बढ़ रही है। इसलिए सिगरेट का सेवन करना और फेेफड़ों के लिए खतरनाक है।
सीओपीडी के लक्षण
-सांस लेने में परेशानी होना
-खांसी, जुकाम होना
-सीने में जकड़न होना
-दिल से जुड़ी समस्याएं होना
ऐसे करें सीओपीडी से बचाव-
-धुम्रपान न करें
-संक्रमणों जैसे फ्लू और न्यूमोनिया के खिलाफ समय पर टीकाकरण कराएं
-प्रदूषण की जगह न जाएं
-ठंड में बाहर निकलने पर थोड़ा परहेज करें
इन्फ्लुएंजा वैक्सीन से काफी हद तक हो सकता है बचाव
सीओपीडी से बचाव के लिए लोगों को समय से इन्फ्लुएंजा वैक्सीन लगवानी चाहिए। एरोसोल थेरेपी से सीओपीडी ठीक होने में काफी मदद मिली है। सिगरेट के धुएं और प्रदूषण की वजह से ज्यादातर लोग सीओपीडी के शिकार हो रहे हैं। - डॉ. अनिल अनिल अग्रवाल, चिकित्सक