पुलिसकर्मियों को सम्मानित करने को लिखा पत्र
बिजनौर। कोर्ट परिसर में गोली बरसाने के दौरान सीजेएम के गनर समेत बाकी पुलिसवाले तीनों हत्यारोपियों को दबोचा। इन पुलिसवालों को सम्मानित करने के लिए शासन को पत्र लिखा जा रहा है। शाहनवाज की हत्या को अंजाम दिए जाने के दौरान कोर्ट के अंदर तमाम लोग मौजूद थे। सुमित, साहिल व अफराज अंधाधुंध गोलियां बरसा रहे थे। ऐसे में गोली किसी को भी लग सकती थी। तभी पैरोकार विकास, सिपाही मनीष व सीजेएम के गनर रवि पवार व दिल्ली पुलिस के पुलिसकर्मी संजीव कुमार ने अपनी जान पर खेलकर तीनों शूटरों को दबोच लिया। शूटरों के हाथों से पिस्टल छीन ली। यदि इनसे पिस्टल नहीं छीने जाते, तो अन्य भी कई लोगों की जान जा सकती थी। एसपी संजीव त्यागी का कहना है कि चारों पुलिसकर्मियों ने साहस दिखाते हुए शूटरों को दबोचा, इसीलिए पुलिसकर्मियों के नाम सम्मानित कराने के लिए शासन को भेजे जा रहे हैं।
- .30 बोर के पिस्टल से बरसाई गोलियां
बिजनौर। हत्यारोपियों ने शाहनवाज और जब्बार पर हमला करने के लिए .30 बोर के पिस्टलों का इस्तेमाल किया। तीनों ही आरोपियों के पास इसी बोर के पिस्टल बरामद हुए। शाहनवाज को मारने में आरोपी कामयाब हो गए, लेकिन जब्बार कोर्ट परिसर से भाग गया था।
- शाहनवाज को लगी 11 गोलियां
बिजनौर। हत्यारोपियों ने शाहनवाज पर तब तक गोलियां बरसाईं, जब तक शाहनवाज के शरीर से जान नहीं निकल गई। तीनों बदमाशों के पास पिस्टल थीं। गोलियां लगते ही शाहनवाज गिर गया था, लेकिन उसके बाद भी बदमाशों ने शाहनवाज पर गोलियां बरसानी बंद नहीं कीं। पुलिस ने शाहनवाज का शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। पता चला है कि शाहनवाज को 11 गोलियां लगीं।
- चार मुकदमों में थी पेशी
बिजनौर। शाहनवाज और जब्बार को दिल्ली की तिहाड़ जेल से चार मुकदमों की पेशी के लिए बिजनौर स्थित कोर्ट में लाया गया था। इनमें नजीबाबाद निवासी हाजी अहसान और उनके भांजे शादाब की हत्या के अलावा दो मुकदमे कोतवाली सिटी के हैं।