प्रस्तावित लेपर्ड रिजर्व फॉरेस्ट का नक्शा। स्रोत विभाग
बिजनौर। नजीबाबाद की साहनपुर व राजगढ़ को प्रदेश का लेपर्ड रिजर्व फॉरेस्ट बनाने की तैयारी चल रही है। इसका प्रस्ताव भी वन संरक्षक स्तर से शासन को भेज दिया गया। इसके बनने के बाद लेपर्ड (गुलदार) नियंत्रण बेहतर होगा ही, साथ ही पर्यटन के लिए भी एक नया क्षेत्र अमानगढ़ की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इसमें करीब 26 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
जिले में लेपर्ड की संख्या पिछले चार साल में बहुत तेजी से बढ़ी है। अनुमान है कि जिले में केवल गन्ने के खेतों में ही 500 से ज्यादा गुलदार घूम रहे हैं। पिछले तीन साल में 27 लोगों की जान लेपर्ड के हमलों में जा चुकी है। वहीं पिछले पांच साल में 100 से ज्यादा लेपर्ड पकड़े जा चुके हैं, जिन्हें कानपुर, गोरखपुर, लखनऊ के चिड़ियाघर में भेजा गया।
हालात यहां तक पहुंच गए कि चिड़ियाघर की क्षमता बिजनौर के लेपर्ड के कारण पूरी हो गई और अब चिड़ियाघर प्रशासन इन्हें लेने से इनकार करने लगा है। ऐसे में अब वन विभाग, नजीबाबाद की साहनपुर और राजगढ़ रेंज को ही लेपर्ड रिजर्व फॉरेस्ट बनाने की तैयारी कर रहा है। वन संरक्षक मुरादाबाद से इसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है।
प्रस्तावित साहनपुर और राजगढ़ रेंज : नजीबाबाद प्रभाग में पड़ने वाली साहनपुर रेंज का क्षेत्रफल 2205 हेक्टेयर व राजगढ़ रेंज का 656 हेक्टेयर क्षेत्र है। जिसे इस प्रस्ताव में शामिल किया गया है। इसके पहुंच मार्ग की बात करें तो नजीबाबाद-हरिद्वार रोड से राजगढ़ होते हुए सालवन क्षेत्र से होगा। दूसरा पहुंच मार्ग नजीबाबाद-हरिद्वार रोड़ से ही साहनपुर होते हुए कुआवाली बीट से होगा।
तीसरा पहुंच मार्ग उत्तराखंड की सीमा की ओर से उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड को विभाजित करने वाली कंडी रोड से होगा। नजीबाबाद प्रभाग मुख्यालय से निकटतम दूरी लगभग 20 किलोमीटर होगी।